प्रयागराज के संगम स्थित प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर के कपाट गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद 13 दिनों बाद फिर से खोल दिए गए हैं। भव्य आरती और ढोल-नगाड़ों के बीच भक्तों ने बजरंगबली के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।

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  • गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण 13 दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रखे गए थे।
  • जलस्तर घटने के बाद मंदिर परिसर की विशेष सफाई और अभिषेक किया गया।
  • महंत बलवीर गिरि द्वारा भव्य आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोला गया।
  • संगम क्षेत्र में भक्तों की भारी भीड़ और जयकारों का माहौल बना हुआ है।

प्रयागराज के पावन संगम क्षेत्र से एक बड़ी धार्मिक खबर सामने आई है। संगम स्थित विश्व प्रसिद्ध लेटे बजरंगबली मंदिर के कपाट 13 दिनों के लंबे इंतजार के बाद शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए हैं। अगस्त के अंत में गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने के कारण मंदिर परिसर जलमग्न हो गया था, जिसके चलते सुरक्षा और धार्मिक कारणों से मंदिर के पट बंद करने पड़े थे।

बाढ़ का पानी कम होने के बाद, मंदिर प्रशासन ने सबसे पहले परिसर की गहन सफाई और धुलाई का कार्य संपन्न किया। इसके पश्चात, बजरंगबली का विधि-विधान से अभिषेक किया गया और उन्हें ताजे फूलों से अत्यंत भव्य रूप में श्रृंगारित किया गया। इस विशेष अवसर पर महंत बलवीर गिरि ने मंत्रोच्चार के बीच भव्य आरती संपन्न की, जिसके बाद ढोल-नगाड़ों की थाप पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि प्रयागराज का लेटे हनुमान मंदिर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर के कपाट बंद होने से श्रद्धालुओं में भारी व्याकुलता थी। जलस्तर के घटने के साथ ही मंदिर का खुलना स्थानीय अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन के पुनरुद्धार का संकेत है।

प्रयागराज का संगम क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं और धार्मिक आस्था के बीच एक अनूठा संतुलन प्रस्तुत करता है, जहाँ गंगा का जलस्तर सीधे तौर पर आस्था के प्रवाह को नियंत्रित करता है।

गौरतलब है कि 30 अगस्त से गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मंदिर के भीतर पानी भर गया था। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर के बाहर से ही दूर से दर्शन कर रहे थे। अब जब स्थिति सामान्य हो गई है, तो संगम क्षेत्र में एक बार फिर भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। श्रद्धालुओं के जयकारों और 'जय श्रीराम' के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

लेटे हनुमान मंदिर की मान्यता अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट है। यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में है, जो भक्तों को एक अलग ही शांति और शक्ति का अनुभव कराती है। संगम के तट पर स्थित होने के कारण, यहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल की दिव्यता भी समाहित है।

Did You Know?: लेटे हनुमान मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में है, जो इस मंदिर को दुनिया के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग बनाती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: लेटे हनुमान मंदिर के कपाट क्यों बंद किए गए थे?
उत्तर: गंगा नदी के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि और बाढ़ के कारण मंदिर परिसर जलमग्न हो गया था, जिससे सुरक्षा के लिहाज से कपाट बंद करने पड़े थे।

प्रश्न 2: मंदिर के कपाट कब खुले?
उत्तर: 13 दिनों तक बंद रहने के बाद, गंगा का जलस्तर घटने पर शनिवार को मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।