तमिलनाडु भर में विनायक चतुर्थी का त्योहार अत्यधिक धार्मिक उत्साह, रचनात्मकता और भव्य पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया। कोयंबटूर में 190 टन की विशालकाय मूर्ति से लेकर मदुरै में महाप्रसाद के रूप में चढ़ाए गए विशाल मोदक तक, लाखों श्रद्धालुओं ने विघ्नहर्ता भगवान गणेश का स्वागत किया।
- तमिलनाडु में विनायक चतुर्थी के अवसर पर विशालकाय मूर्तियों और भव्य पंडालों के साथ पारंपरिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।
- कोयंबटूर में 190 टन वजनी और मदुरै में 7 फीट ऊंची विशालकाय गणेश प्रतिमाएं मुख्य आकर्षण का केंद्र रहीं।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों के तहत केवल पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों की स्थापना और सुरक्षित विसर्जन की व्यवस्था की गई।
तमिलनाडु में सोमवार को विनायक चतुर्थी का त्योहार पारंपरिक आस्था और आधुनिक रचनात्मकता के अद्भुत संगम के साथ मनाया गया। पूरे राज्य में ताजे केले के पत्तों, सुगंधित फूलों और भाप से पकते गुड़ के मोदकों की दिव्य सुगंध हवा में तैरती रही। लाखों परिवारों ने अपने घरों में मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की, जिन्हें स्थानीय लोग अत्यंत प्रेम से 'पिल्लायर' कहकर पुकारते हैं।
सुबह होते ही राज्य के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। चेन्नई के ऐतिहासिक कपालेश्वर मंदिर में उत्सव की शुरुआत तड़के गणपति होमम के साथ हुई। यहाँ 'नर्तक विनायक' की मूर्ति का पवित्र जल, दूध, चंदन और शहद से महाअभिषेक किया गया और उन्हें सोने के चमकदार कवच (कवचम) से सजाया गया, जिसके दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
मदुरै और त्रिची में ऐतिहासिक महाप्रसाद की परंपरा
मदुरै के विश्व प्रसिद्ध श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में स्थापित 7 फीट ऊंची विशालकाय एकल-शिला (मोनोलिथिक) 'मुक्कुरुनी विनायक' की प्रतिमा इस बार भी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए मंदिर के पुजारियों ने भगवान को एक ही विशालकाय 'मुक्कुरुनी कोझुकट्टई' (चावल के आटे और गुड़ से बना मीठा मोदक) का भोग लगाया। इस खुशी में और इजाफा करते हुए, मंदिर प्रशासन ने असम से लाई गई 5 वर्षीय हथिनी 'दुर्गा' का फूलों की वर्षा के साथ स्वागत किया, जिसने इस उत्सव में पहली बार भाग लिया।
दूसरी ओर, तिरुचिरापल्ली में 273 फीट ऊंचे ऐतिहासिक रॉकफोर्ट की चोटी पर स्थित 7वीं शताब्दी के उच्छी पिल्लायर मंदिर तक पहुंचने के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने 417 सीढ़ियां चढ़ीं। इस पहाड़ी मंदिर में 14 दिवसीय 'पेरुविझा' उत्सव की शुरुआत भगवान को 25 किलोग्राम का विशाल कोझुकट्टई अर्पित करके की गई।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि तमिलनाडु में विनायक चतुर्थी का यह उत्सव न केवल गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पारंपरिक विरासत और आधुनिक पर्यावरण चेतना के बीच एक बेहतरीन संतुलन को भी दर्शाता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के कड़े दिशा-निर्देशों और पुलिस की सक्रियता ने यह सुनिश्चित किया है कि आस्था के इस महापर्व से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान न पहुंचे।
"इस वर्ष की विनायक चतुर्थी में सांस्कृतिक भव्यता और पारिस्थितिक जिम्मेदारी का अनूठा संगम देखने को मिला है, जो समाज में बढ़ती पर्यावरण जागरूकता का एक उत्कृष्ट प्रमाण है।"
कोयंबटूर के पुलियाकुलम में स्थित श्री अरुलमिगु मुंधी विनायक मंदिर में भी विशेष पूजा और श्रृंगार किया गया। यहाँ भगवान गणेश की मूर्ति 19 फीट 10 इंच ऊंची, 11 फीट 10 इंच चौड़ी और लगभग 190 टन वजनी है। इस विशालकाय प्रतिमा को एक ही ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर बनाया गया है और इस अवसर पर इसे 50 किलोग्राम चंदन के लेप से सुशोभित किया गया। इसके अतिरिक्त, तिरुवन्नामलाई में 51,000 रुद्राक्ष मोतियों से बनी गणेश जी की मूर्ति भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही।
| मंदिर और स्थान | मूर्ति की ऊंचाई / आयाम | अनोखा प्रसाद / विशेषता |
|---|---|---|
| श्री अरुलमिगु मुंधी विनायक (कोयंबटूर) | 19 फीट 10 इंच ऊंची, 190 टन वजनी | एकल-शिला ग्रेनाइट मूर्ति, 50 किलो चंदन के लेप से श्रृंगार |
| मुक्कुरुनी विनायक (मदुरै) | 7 फीट ऊंची (एकल-शिला) | एक विशाल 'मुक्कुरुनी कोझुकट्टई' (मीठा मोदक) का भोग |
| उच्छी पिल्लायर मंदिर (तिरुचिरापल्ली) | 273 फीट ऊंचे रॉकफोर्ट की चोटी पर | 14 दिवसीय उत्सव की शुरुआत के लिए 25 किलो का विशाल कोझुकट्टई |
सार्वजनिक उत्सवों के हिस्से के रूप में, हिंदू मुन्नानी ने पूरे राज्य में लगभग 1.5 लाख गणेश मूर्तियों की स्थापना की। अकेले चेन्नई में वल्लुवर कोट्टम, त्रिप्लिकेन और उत्तरी चेन्नई जैसे क्षेत्रों में 5,501 सार्वजनिक पंडाल सजाए गए। आयोजकों ने पुष्टि की कि ये मूर्तियां पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक सामग्रियों से बनाई गई थीं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चेन्नई पुलिस ने 16,500 से अधिक कर्मियों को तैनात किया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. चेन्नई में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन ने क्या विशेष व्यवस्था की है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के तहत पट्टिनपक्कम और नीलंकरई समुद्र तटों पर सीधे विसर्जन प्रतिबंधित है। प्रशासन ने विसर्जन जुलूसों के लिए 17 विशिष्ट मार्ग और कासिमेडु फिशिंग हार्बर तथा श्रीनिवासपुरम जैसे चुनिंदा विसर्जन स्थल निर्धारित किए हैं।
2. इस वर्ष के उत्सव में कौन से अनोखे थीम और आकर्षण देखने को मिले?
इस वर्ष तिरुवन्नामलाई में 51,000 रुद्राक्ष मोतियों से बनी मूर्ति, कुड्डालोर में 74 किलो के लड्डू वाले विनायक और थेनकानिकोत्तई में लोकप्रिय फिल्म 'कांतारा-2' की थीम पर आधारित भव्य मंच मुख्य आकर्षण रहे।