एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग के कारण अल नीनो की घटनाएं अब पहले की तुलना में 36% अधिक शक्तिशाली हो गई हैं। यह बदलाव दुनिया भर में भीषण गर्मी, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसम स्थितियों का कारण बन सकता है।
- मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने अल नीनो की शक्ति में 36% की वृद्धि की है।
- पिछले 40 वर्षों में अल नीनो की तीव्रता में 16% का उछाल आया है, जो तेजी से बढ़ते खतरे का संकेत है।
- यह घटना वैश्विक तापमान वृद्धि और जीवाश्म ईंधन के जलने के सीधे संबंध से जुड़ी है।
हाल ही में 'Science' पत्रिका में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने चेतावनी दी है कि मानव गतिविधियों के कारण होने वाला ग्लोबल वार्मिंग अल नीनो (El Nino) की घटनाओं को और अधिक विनाशकारी बना रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, औद्योगिक युग की शुरुआत से अब तक अल नीनो की शक्ति में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
यह अध्ययन विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि पिछले केवल 40 वर्षों के भीतर इसमें 16% की वृद्धि देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब और भी तीव्र गति से बढ़ रहा है। अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में होने वाला एक अस्थायी तापन है, जो पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न को अस्त-व्यस्त कर सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अल नीनो की बढ़ती शक्ति का सीधा अर्थ है वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा संकट। जब अल नीनो शक्तिशाली होता है, तो यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी, विनाशकारी बाढ़ और गंभीर सूखे का कारण बनता है, जिससे कृषि और मत्स्य पालन को खरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।
"अल नीनो जलवायु परिवर्तनशीलता का सबसे हिंसक पहलू है, जिसके प्रभाव स्थानीय मत्स्य पालन के पतन से लेकर दुनिया भर में गंभीर सूखे और खाद्य संकट तक हो सकते हैं।" - बोरिस वर्म, समुद्री वैज्ञानिक।
अध्ययन की मुख्य लेखिका, मिशिगन विश्वविद्यालय की पुरा-जलवायु वैज्ञानिक जूलिया कोल ने बताया कि अल नीनो की शक्ति में वृद्धि का सीधा संबंध वैश्विक तापमान में होने वाली वृद्धि से है। शोधकर्ताओं ने पिछले 900 वर्षों के डेटा का विश्लेषण किया है ताकि इस प्रवृत्ति को समझा जा सके।
अल नीनो की तीव्रता का मापन
अल नीनो की ताकत को मध्य प्रशांत क्षेत्र में पानी के तापमान के माध्यम से मापा जाता है। यदि तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है, तो इसे अल नीनो माना जाता है, जबकि 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक के तापमान को "अत्यधिक शक्तिशाली" माना जाता है। वर्तमान में, कोलंबिया विश्वविद्यालय के ट्रैकर के अनुसार, तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
Frequently Asked Questions
1. अल नीनो क्या है?
अल नीनो प्रशांत महासागर के एक हिस्से में पानी के तापमान का असामान्य रूप से गर्म होना है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है।
2. जलवायु परिवर्तन अल नीनो को कैसे प्रभावित कर रहा है?
जीवाश्म ईंधन के जलने से बढ़ता तापमान समुद्र के तापमान को बढ़ाता है, जिससे अल नीनो की घटनाएं अधिक तीव्र और विनाशकारी हो जाती हैं।