संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी WMO ने चेतावनी दी है कि एल नीनो और अधिक शक्तिशाली हो सकता है, जिससे भारत में मानसून के कमजोर होने और सूखे की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।

मुख्य बातें

  • WMO ने 'सुपर एल नीनो' की चेतावनी जारी की है जो अगस्त-अक्टूबर के बीच मजबूत होगा।
  • IMD के अनुसार, अगस्त में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
  • एल नीनो के कारण तापमान में वृद्धि और बारिश के पैटर्न में भारी बदलाव आ सकता है।
  • जून में भारी सूखा देखने के बाद, जुलाई में सुधार हुआ लेकिन अब फिर से खतरा मंडरा रहा है।

भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जून का महीना एक सदी में सबसे खराब मानसून घाटे के साथ समाप्त हुआ था, जिसके बाद जुलाई में कुछ सुधार देखने को मिला। हालांकि, अब एक नई वैश्विक जलवायु चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की मौसम एजेंसी, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि एल नीनो (El Nino) आने वाले महीनों में एक शक्तिशाली घटना के रूप में विकसित हो सकता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही भविष्यवाणी की है कि अगस्त के दौरान होने वाली बारिश सामान्य से कम रह सकती है। WMO के अनुसार, 'सुपर एल नीनो' के अगस्त-अक्टूबर 2026 की अवधि के दौरान मजबूत होने की उम्मीद है। गर्म महासागरों और सकारात्मक भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) के साथ मिलकर, यह दुनिया भर में सामान्य से अधिक तापमान ला सकता है और बारिश के पैटर्न को पूरी तरह से बदल सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एल नीनो का प्रभाव केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि मानसून का दूसरा भाग कमजोर रहता है, तो इसका सीधा असर फसलों, खाद्य कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। एल नीनो प्रशांत महासागर में गर्म पानी के कारण होता है, लेकिन इसके दुष्परिणाम पूरी दुनिया में महसूस किए जाते हैं।

एल नीनो अब हमारे घरों में प्रवेश कर चुका है, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां और भी गंभीर हो गई हैं।

इस साल का मानसून काफी अनिश्चित रहा है। जून में 39.8% की बारिश की कमी दर्ज की गई थी, जिसने इसे एक सदी के सबसे सूखे जूनों में से एक बना दिया। हालांकि जुलाई में कम दबाव वाले सिस्टम के कारण बारिश बढ़ी, लेकिन IMD का अनुमान है कि अगस्त में बारिश सामान्य के लगभग 94% तक ही रह सकती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक होने के कारण होती है। ऐतिहासिक रूप से, एल नीनो के वर्षों में भारत में कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति देखी गई है, जो कृषि प्रधान देश के लिए गंभीर संकट पैदा करती है।

क्या आप जानते हैं?: एल नीनो के कारण प्रशांत महासागर का तापमान इतना बढ़ सकता है कि यह वैश्विक मौसम चक्र को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. एल नीनो का मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
एल नीनो आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करता है, जिससे कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

2. IMD की अगस्त के लिए क्या भविष्यवाणी है?
IMD के अनुसार, अगस्त में बारिश सामान्य से कम (लगभग 94%) रहने की संभावना है।