भारत और श्रीलंका के शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाटी और शोलाई वनों में तीन नई जंपिंग स्पाइडर प्रजातियों की पहचान की। इस खोज ने इन उच्चस्थलीय आवासों की अनोखी विकासवादी इतिहास को उजागर किया और संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ब्रह्मगिरी और साइलेंट वैली में दो नई प्रजातियाँ, श्रीलंका में एक नई प्रजाति खोजी गई।
  • इन प्रजातियों का आवास केवल शोलाई वनों तक सीमित है, जिससे उनका अस्तित्व संवेदनशील है।
  • पश्चिमी घाटी के शोलाई इकोसिस्टम के संरक्षण के लिए तात्कालिक कार्रवाई की आवश्यकता है।

एक सहयोगी टीम, जिसमें अथिरा जोसे (क्राइस्ट कॉलेज, इरिनजलाकुडा) और प्रोफ़ेसर ए.वी. सुधिकुमार के साथ श्रीलंका के राष्ट्रीय मूलभूत अध्ययन संस्थान (NIFS) के प्रोफ़ेसर एस.पी. बेंजामिन शामिल हैं, ने तीन नई दुर्लभ जंपिंग स्पाइडर प्रजातियों की पहचान की। ये प्रजातियाँ Onomastus जीनस से संबंधित हैं, जो उष्णकटिबंधीय एशिया में सीमित पाई जाती हैं।

नई प्रजातियों का विवरण

पहली प्रजाति, Onomastus brahmagiri, ब्रह्मगिरी पहाड़ियों, वैयनाड में खोजी गई, जबकि दूसरी, Onomastus silentvalley, पलेक्कड़ के साइलेंट वैली नेशनल पार्क के शोलाई जंगलों में मिली। तीसरी, Onomastus wijesinghei, श्रीलंका के पर्वतीय वनों में पाई गई। इन सभी को Zootaxa जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

पुनः खोजी गई प्रजाति और विज्ञानिक महत्व

टीम ने तमिलनाडु के पम्पाडु शोलाई नेशनल पार्क में Onomastus patellaris को भी पुनः खोजा, जो पिछले एक सदी से मानव दृष्टि से अदृश्य थी। यह खोज पश्चिमी घाटी के शोलाई वनों के अनूठे विकासात्मक इतिहास को उजागर करती है, जहाँ अलग‑अलग “स्काई आइलैंड” के रूप में कार्य करने वाले पर्वत शिखर जीव विविधता को प्रोत्साहित करते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव और संरक्षण की आवश्यकता

इन नई प्रजातियों की सीमित वितरण, उच्चस्थलीय शोलाई आवासों में केवल मौजूद होने के कारण, जलवायु परिवर्तन, तापमान वृद्धि और मानवजन्य आक्रमण के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन “स्काई आइलैंड” अवधारणा के तहत, शोलाई वनों की रक्षा करना न केवल जैव विविधता बल्कि उन अनोखी विकासात्मक प्रक्रियाओं की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है, जो यहाँ घटित होती हैं।