त्रिशूर स्थित समथा ने भारत की पहली महिला वाणिज्यिक गहरी समुद्र डाइवर एथुल्या के अद्वितीय योगदान को सागर पुरस्कार के माध्यम से मान्यता दी। इस समारोह में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त समुद्री वैज्ञानिक डॉ. सवित्री नारायणन ने पुरस्कार प्रदान किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एथुल्या को सागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया
- डॉ. सवित्री नारायणन ने पुरस्कार प्रस्तुत किया
- समथा ने महिला समुद्री विज्ञान में समानता को बढ़ावा दिया
समथा, त्रिशूर स्थित एक लिंग न्याय के लिए समर्पित संगठन, ने भारत की पहली महिला वाणिज्यिक गहरी समुद्र डाइवर एथुल्या के.वी. को सागर पुरस्कार से सम्मानित किया। यह समारोह 15 जुलाई 2026 को पलकड़ के सरकारी विक्टोरिया कॉलेज में आयोजित हुआ।
समस्या के पृष्ठभूमि
भारत में समुद्री विज्ञान और वाणिज्यिक डाइविंग का इतिहास अपेक्षाकृत नया है, और इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बहुत ही कम रही है। एथुल्या ने न केवल इस बाधा को तोड़ते हुए व्यावसायिक गहरी समुद्र डाइविंग में प्रवेश किया, बल्कि कई वर्षों के कठोर प्रशिक्षण और कई राष्ट्रीय-विदेशी अभियानों में भाग लेकर इस क्षेत्र में मानक स्थापित किए।
सागर पुरस्कार और डॉ. सवित्री नारायणन
सागर पुरस्कार समथा द्वारा स्थापित एक वार्षिक सम्मान है, जिसका उद्देश्य समुद्री विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को मान्यता देना है। इस वर्ष का पुरस्कार डॉ. सवित्री नारायणन द्वारा प्रस्तुत किया गया, जो हार्वर्ड‑प्रशिक्षित समुद्री वैज्ञानिक, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य हाइड्रोग्राफर और कनाडा के हाइड्रोग्राफिक सर्विस की पूर्व निदेशक हैं। उन्होंने 2023 में अपने ही योगदान के लिए इस पुरस्कार को प्राप्त किया था, और इस बार उन्होंने एथुल्या को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
समारोह की मुख्य बातें
विक्टोरिया कॉलेज की प्रिंसिपल माया सी. नायर ने समारोह का संचालन किया और दोनों प्रमुख अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए। समथा की ट्रस्टी टी.ए. उजाकुमारी ने बताया कि यह संस्था पहली बार दो महिलाओं—डॉ. नारायणन और एथुल्या—को एक ही मंच पर सम्मानित कर रही है, जिससे लिंग समानता के नए क्षितिज खुलते हैं। आईक्यूएसी समन्वयक प्रदीप के., कॉलेज यूनियन प्रतिनिधि के. यादव कृष्ण और समथा कार्यकारी सदस्य वी.पी. शानिबा ने भी अपने विचार साझा किए।
भविष्य की दिशा
समारोह के बाद हुई चर्चा में डॉ. नारायणन और एथुल्या ने गहरी समुद्र में कार्य करने की चुनौतियों, आवश्यक प्रशिक्षण, और समुद्री अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से युवा महिलाओं को समुद्री विज्ञान, हाइड्रोग्राफी और वाणिज्यिक डाइविंग जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में करियर अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार, यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों को मान्यता देता है, बल्कि भारत में समुद्री विज्ञान में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है।