प्राइवेट स्पेस लॉन्च कंपनी स्कायरूट एयरोस्पेस ने 18 जुलाई को विक्रम-1 को सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से भेजने की घोषणा की। यह सात-मंजिला रॉकेट 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को 450 किमी के कक्षा में ले जाने के लिए तैयार है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विक्रम-1 का प्री‑लॉन्च परीक्षण समाप्त, 18 जुलाई को लॉन्च तय
- सभी चरण एकीकृत, 3D‑प्रिंटेड इंजन सहित स्व-निर्मित प्रणोदन प्रणाली
- सामग्री‑विज्ञान, टेलीमेट्री और ट्रैकिंग रडार के साथ अंतिम जांच पूर्ण
भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय लिखते हुए, स्कायरूट एयरोस्पेस ने अपने प्रथम निजी विकसित कक्षा‑रॉकेट विक्रम-1 को 18 जुलाई, 2026 को सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से प्रक्षेपित करने का लक्ष्य रखा है। यह घोषणा 16 जुलाई को कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना द्वारा की गई, जिसमें उन्होंने कहा कि यह पहला टेस्ट फ्लाइट “विश्वसनीय डेटा” प्रदान करेगा, जो भविष्य में नियमित लॉन्च शेड्यूल की नींव रखेगा।
विक्रम-1 की तकनीकी विशिष्टताएँ
विक्रम-1 सात मंज़िला ऊँचा, बहु‑स्तरीय रॉकेट है जिसमें सभी‑कार्बन कॉम्पोजिट संरचना और घरेलू रूप से विकसित प्रोपल्शन सिस्टम शामिल है। इसमें 3D‑प्रिंटेड इंजन और उच्च‑थ्रस्ट सॉलिड‑फ्यूल बूस्टर शामिल हैं, जो छोटे उपग्रहों (अधिकतम 350 किग्रा) को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक ले जाने में सक्षम हैं। पहली उड़ान में 60° इन्क्लिनेशन के साथ 450 किमी की कक्षा में प्रवेश करने की योजना है।
वित्तीय और औद्योगिक प्रभाव
स्कायरूट ने बताया कि रॉकेट के सभी चरण सफलतापूर्वक एकीकृत और लॉन्च पैड पर स्टैक किए जा चुके हैं। लॉन्च कंट्रोल सेंटर से टेलीमेट्री ग्राउंड स्टेशन और ट्रैकिंग रडार के साथ इंटरफ़ेस जाँचें भी पूरी हो गई हैं। यह परियोजना लगभग 1,000 कर्मचारियों, 400 आपूर्तिकर्ताओं और 3,000 कार्य दिवसों के सहयोग का परिणाम है, जो भारत में निजी अंतरिक्ष उद्योग की क्षमताओं को उजागर करती है।
वाणिज्यिक मिशन और भविष्य की दिशा
विक्रम-1 ने ग्रहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्कायरूट के स्वयं के SCOPE सहित कई तकनीकी प्रदर्शनी पेलोड्स को ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसमें कॉस्मोस डायमंड्स का कला कार्य “कॉस्मिक ब्लूम” और एक माइक्रो‑आर्ट पीस भी शामिल होगा। चंदाना ने कहा, “छोटे उपग्रहों की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति सीमित है। विक्रम-1 की सफलता भारत को अंतरिक्ष में सभी के लिए एक खुला मंच बनाने की दिशा में एक प्रमुख कदम है।”
आगे का मार्ग
को-फाउंडर एवं COO नागा भरत डाका ने कहा कि इस लॉन्च से प्राप्त डेटा को शॉप फ़्लोर में वापस लेकर रॉकेट की विश्वसनीयता और ऑन‑डिमांड लॉन्च क्षमता को और बेहतर बनाया जाएगा। यह परीक्षण न केवल भारत की स्वदेशी तकनीकी आत्मनिर्भरता को सिद्ध करता है, बल्कि वैश्विक निजी अंतरिक्ष बाजार में प्रतिस्पर्धी रूप से स्थापित होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।