वैज्ञानिकों ने पहली बार ताज़ा पानी की मछलियों में संक्रामक मेलेनोमा की पहचान की। यह रोग वर्मोंट और क्यूबेक के बीच स्थित लेक मेम्प्रेमाॉग में पाए गए ब्राउन कैटफ़िश में पाया गया।

मुख्य बिंदु

  • पहला ज्ञात जलजीव संक्रामक कैंसर
  • लेक मेम्प्रेमाॉग में ब्राउन कैटफ़िश प्रभावित
  • जीनोमिक विश्लेषण ने क्लोनल प्रसार सिद्ध किया

एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने ब्राउन कैटफ़िश (Ameiurus nebulosus) में संक्रामक मेलेनोमा की पहचान की, जो ताज़ा पानी के पारिस्थितिकी तंत्र में पहली बार दर्ज किया गया केस है। यह खोज Nature जर्नल में प्रकाशित हुई है।

2012 में मछुआरों और जीवविज्ञानी ने लेक मेम्प्रेमाॉग में असामान्य रूप से अधिक संख्या में काली घाव वाली कैटफ़िश देखी। जांच में पाया गया कि 23‑37% नमूनों में घातक मेलेनोमा थे, जो इस प्रजाति के लिए अत्यधिक उच्च दर है। शुरुआती अनुमान में जल प्रदूषण या विषाक्त पदार्थों को कारण माना गया, परन्तु जीनोमिक डेटा ने एक अलग दिशा दिखाई।

शोधकर्ताओं ने ट्यूमर और स्वस्थ ऊतकों के पूरे जीनोम को सीक्वेंस किया और पाया कि विभिन्न मछलियों के ट्यूमर कोशिकाएँ एक‑दूसरे से बहुत करीबी थीं, जबकि उनके मेज़बानों से अलग थीं। इस प्रकार ट्यूमर ने अपना स्वतंत्र जीनोमिक पहचान बना रखा था, जो केवल एक ही मूल कैंसर से फैल रहा था।

विशेषतामछली मेलेनोमामानव मेलेनोमा
म्यूटेशन पैटर्नसमान म्यूटेशन कई मछलियों मेंहर रोगी में अनोखा

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार का संक्रामक कैंसर न केवल पारिस्थितिक जोखिम को उजागर करता है, बल्कि कैंसर की कोशिकीय प्रसार तंत्र को समझने के नए रास्ते खोलता है, जो मानव चिकित्सा में भी उपयोगी हो सकता है।

"ट्यूमर कोशिकाओं का क्लोनल प्रसार एक दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण जैविक घटना है, जो कैंसर नियंत्रण के सिद्धांतों को पुनः परिभाषित कर सकती है,"
Did You Know?: विश्व में केवल पाँच ही जीवों में संक्रामक कैंसर दर्ज किया गया है, जिसमें कुत्ते, तस्मानियाई डेविल और अब कैटफ़िश शामिल हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यह कैंसर कैसे फैलता है?

उत्तर: वैज्ञानिक मानते हैं कि प्रजनन के दौरान निकट संपर्क, जल या तलछट में ट्यूमर कोशिकाओं का अस्थायी अस्तित्व, और गिल्स या त्वचा के माध्यम से संक्रमण संभव है।

प्रश्न 2: क्या इंसानों को इस कैंसर से खतरा है?

उत्तर: वर्तमान में कोई सबूत नहीं है कि यह रोग मनुष्यों में संक्रामित हो सकता है; यह केवल मछलियों के बीच देखा गया है।