1973 में वैज्ञानिकों के एक समूह ने कॉनकॉर्ड विमान का उपयोग करके सूर्य ग्रहण की अवधि को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया था। सुपरसोनिक गति के कारण उन्होंने 74 मिनट तक सूर्य के कोरोना का अवलोकन किया।

मुख्य बातें

  • वैज्ञानिकों ने कॉनकॉर्ड विमान का उपयोग करके सूर्य ग्रहण की अवधि को 74 मिनट तक बढ़ा दिया।
  • यह मिशन जून 1973 में अफ्रीका के ऊपर किया गया था।
  • सुपरसोनिक गति के कारण यह पृथ्वी पर संभव नहीं था।

फ्रांस के नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में खड़ा कॉनकॉर्ड F-WTSS 001 प्रोटोटाइप केवल विमानन प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों के लिए भी एक चमत्कार है। इस विमान के लंबे नाक (nose) के ठीक पीछे एक विशेष पेंट किया हुआ मानचित्र है, जो जून 1973 में अफ्रीका के ऊपर से गुजरने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण के मार्ग को दर्शाता है।

यह ऐतिहासिक निशान इसलिए मौजूद है क्योंकि आठ वैज्ञानिकों के एक समूह ने इस विमान को ध्वनि की गति से दोगुनी गति से उड़ाकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने सूर्य ग्रहण की 'टोटलिटी' (पूर्णता की अवधि) को 74 मिनट तक खींच दिया, जो कि एक अभूतपूर्व उपलब्धि थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मिशन भौतिकी और विमानन इंजीनियरिंग के अद्भुत मेल को दर्शाता है। सामान्यतः, भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में भी सूर्य ग्रहण की अधिकतम अवधि केवल 7.5 मिनट होती है। लेकिन कॉनकॉर्ड की सुपरसोनिक गति ने चंद्रमा की छाया के साथ 'रेस' लगाने की अनुमति दी, जिससे वैज्ञानिकों को सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने के लिए अभूतपूर्व समय मिला।

सुपरसोनिक तकनीक ने खगोल विज्ञान के अध्ययन के लिए समय की सीमाओं को तोड़ दिया।

ऐतिहासिक तुलना

विशेषताजमीन से अवलोकनकॉनकॉर्ड मिशन
अधिकतम अवधिलगभग 7.5 मिनट74 मिनट
गतिस्थिरध्वनि से दोगुनी (Supersonic)

आगामी 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण के संदर्भ में, जो यूरोप के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा, जमीन से इसकी अवधि केवल दो मिनट से थोड़ी अधिक होगी। यह कॉनकॉर्ड मिशन की महानता को फिर से रेखांकित करता है।

क्या आप जानते हैं?: कॉनकॉर्ड दुनिया का पहला व्यावसायिक सुपरसोनिक यात्री विमान था जो ध्वनि की दीवार को तोड़ सकता था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: वैज्ञानिकों ने कॉनकॉर्ड का उपयोग क्यों किया?
उत्तर: चंद्रमा की छाया के साथ तालमेल बिठाने के लिए विमान को उसकी गति से तेज उड़ना था ताकि ग्रहण की अवधि बढ़ सके।

प्रश्न 2: यह रिकॉर्ड कहाँ दर्ज है?
उत्तर: यह उपलब्धि जून 1973 में अफ्रीका के ऊपर दर्ज की गई थी।