आदित्य‑L1 के नवीनतम डेटा ने दिखाया कि सौर कोरॉना का अधिकांश ऊर्जा स्रोत जटिल चुंबकीय फ़ील्ड की पुनःसंयोजन है, जबकि सतही तरंगें केवल 7% योगदान देती हैं। यह खोज सूर्य के तापमान के रहस्य को समझने में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बिंदु

  • आदित्य‑L1 ने कोरॉना की ऊर्जा का 93% स्रोत पहचान किया।
  • सौर सतह की तरंगें केवल 7% ऊर्जा प्रदान करती हैं।
  • चुंबकीय क्षेत्र की पुनःसंयोजन ही प्रमुख ऊर्जा स्रोत है।

कोरॉना का तापमान रहस्य अब स्पष्ट

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रथम सौर अवलोकन मिशन, आदित्य‑L1, ने हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में बताया कि सूर्य की बाहरी वायुमंडलीय परत—कोरॉना—को इतना उच्च तापमान बनाए रखने का मुख्य कारण जटिल चुंबकीय फ़ील्ड की पुनःसंयोजन है।

प्रोफ़ेसर आर. रामेश, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान (IIA) के प्रमुख वैज्ञानिक, ने बताया कि सतह की बबलिंग गति से उत्पन्न तरंगें केवल 7% ऊर्जा प्रदान करती हैं, जबकि शेष 93% ऊर्जा चुंबकीय फ़ील्ड की निरंतर टकराव और पुनःसंयोजन से आती है।

Historical Background

सूर्य के कोर से लेकर कोरॉना तक तापमान में अत्यधिक अंतर हमेशा से वैज्ञानिकों के लिये एक पहेली रहा है। कोर में तापमान लगभग 15 मिलियन°C है, फोटोस्फीयर (सतह) पर लगभग 5,500°C, और कोरॉना में सामान्यतः 2 मिलियन°C से लेकर कभी‑कभी 40 मिलियन°C तक पहुंचता है। इस असामान्य गर्मी को समझने के लिये पिछले दशकों में कई सिद्धांत प्रस्तावित किए गए, लेकिन कोई भी पूर्ण रूप से सिद्ध नहीं हो पाया।

परतऔसत तापमान (°C)
कोर15,000,000
फोटोस्फीयर5,500
कोरॉना2,000,000 – 40,000,000

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस खोज से न केवल सौर भौतिकी के मौलिक सिद्धांतों में सुधार होगा, बल्कि सौर तूफ़ानों के प्रभाव को पूर्वानुमानित करने के लिये नई तकनीकें विकसित की जा सकेंगी, जो उपग्रह, विद्युत ग्रिड और संचार प्रणालियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगी।

"सौर चुंबकीय फ़ील्ड की पुनःसंयोजन को समझना भविष्य की स्पेसवेदर भविष्यवाणी का मूल आधार होगा," कहते हैं अंतरिक्ष भौतिक विज्ञानी डॉ. अनीता सिंह।
क्या आप जानते हैं?: सूर्य के कोरॉना को केवल पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय ही पृथ्वी से बिना उपकरण के देखा जा सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह खोज सौर ऊर्जा को पृथ्वी पर उपयोग करने में मदद करेगी?

उत्तर: अभी यह शोध मुख्यतः सौर भौतिकी को समझने पर केंद्रित है, लेकिन भविष्य में सौर ऊर्जा संग्रहण प्रणालियों के विकास में इसका योगदान हो सकता है।

प्रश्न 2: आदित्य‑L1 ने कौन-से उपकरण से यह डेटा प्राप्त किया?

उत्तर: डेटा Velc (Visible Emission Line Coronagraph) नामक कोरोनाग्राफ़ द्वारा रिकॉर्ड किया गया था, जिसने 5 अगस्त 2024 की तीव्र CME को कैप्चर किया।