अटलांटिक तूफान सीजन इस साल असामान्य रूप से शांत रहा है। प्रशांत महासागर में एल नीनो की तीव्रता और अफ्रीका से आने वाली शुष्क धूल ने मिलकर उष्णकटिबंधीय तूफानों के विकास को रोक दिया है।

  • एल नीनो और सहारा की धूल ने मिलकर अटलांटिक तूफान सीजन को कमजोर कर दिया है।
  • प्रशांत महासागर के तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि से 'विंड शीयर' बढ़ा है, जो तूफानों को बनने से रोकता है।
  • अटलांटिक शांत है, लेकिन पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में टाइफून की गतिविधि पिछले 50 वर्षों में सबसे अधिक रही है।

अटलांटिक तूफान सीजन अपने मध्य चरण में है, लेकिन इस साल की स्थिति बेहद असामान्य है। जून की शुरुआत से अब तक इस बेसिन में केवल तीन नामी तूफान देखे गए हैं, जो काफी कमजोर और अव्यवस्थित थे। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अगस्त के मध्य तक केवल एक या दो और उष्णकटिबंधीय तूफान ही बन पाएंगे।

इस साल की सबसे बड़ी वजह एल नीनो (El Niño) है, जो प्रशांत महासागर के एक महत्वपूर्ण हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान को अभूतपूर्व स्तर तक ले गया है। आमतौर पर, एल नीनो के लिए तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर होना चाहिए, लेकिन वर्तमान माप दिखाते हैं कि यह औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस और कुछ क्षेत्रों में 4 डिग्री सेल्सियस तक अधिक है।

प्रशांत महासागर में यह अत्यधिक गर्मी ऊपरी स्तर के हवा के पैटर्न को बदल देती है। इसके परिणामस्वरूप अटलांटिक बेसिन में पूर्व की ओर चलने वाली तेज हवाएं चलती हैं, जिसे 'विंड शीयर' (Wind Shear) कहा जाता है। चूंकि गरज-चमक वाले तूफान ही उष्णकटिबंधीय प्रणालियों के बीज होते हैं, इसलिए ये तेज हवाएं उनके ढांचे को नष्ट कर देती हैं और उन्हें बड़े तूफान में बदलने से रोकती हैं।

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वैश्विक जलवायु प्रणालियाँ आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। जब प्रशांत महासागर में ऊर्जा बढ़ती है, तो इसका सीधा प्रभाव अटलांटिक की सुरक्षा पर पड़ता है। हालांकि यह अमेरिका और कैरिबियन के तटीय क्षेत्रों के लिए राहत की बात है, लेकिन यह वैश्विक मौसम असंतुलन का संकेत है।

"प्रकृति का संतुलन ऐसा है कि एक महासागर की शांति दूसरे महासागर की उथल-पुथल का परिणाम होती है।"

केवल एल नीनो ही नहीं, बल्कि सहारा रेगिस्तान की शुष्क और धूल भरी हवाएं भी एक 'ढक्कन' की तरह काम कर रही हैं, जो वायुमंडल को दबा देती हैं और तूफानों के विकास को असंभव बना देती हैं। साथ ही, पश्चिम अफ्रीकी मानसून इस साल कमजोर रहा है, जिससे अटलांटिक में आने वाले गड़बड़ी (disturbances) की संख्या कम हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि जहां अटलांटिक शांत है, वहीं पश्चिमी प्रशांत टाइफून सीजन पिछले 50 वर्षों में सबसे व्यस्त रहा है। यहाँ कई तूफान श्रेणी-5 की तीव्रता तक पहुँच चुके हैं।

क्षेत्र वर्तमान स्थिति मुख्य कारक
अटलांटिक बेसिन अत्यधिक शांत (कम तूफान) विंड शीयर और सहारा धूल
पश्चिमी प्रशांत अत्यधिक सक्रिय (अधिक टाइफून) गर्म समुद्री तापमान (एल नीनो)

भले ही तूफानों की संख्या कम हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो के वर्षों में भी कुछ विनाशकारी तूफान आ सकते हैं। उदाहरण के लिए, उष्णकटिबंधीय तूफान आर्थर ने लुइसियाना में भारी बारिश का रिकॉर्ड तोड़ा। इसलिए तटीय निवासियों को अभी भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।

क्या आप जानते हैं?: संचित चक्रवात ऊर्जा (ACE) का उपयोग सीजन की तीव्रता मापने के लिए किया जाता है। इस साल अटलांटिक का ACE औसत (122.5) के मुकाबले केवल 3.1 है, जो औसत का मात्र 23% है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. एल नीनो तूफान को कैसे रोकता है?
एल नीनो प्रशांत महासागर में गर्मी बढ़ाता है, जिससे अटलांटिक में 'विंड शीयर' पैदा होता है। यह तेज हवाएं तूफानों के बनने की प्रक्रिया को बाधित करती हैं।

2. क्या सहारा की धूल वास्तव में मौसम को प्रभावित करती है?
हाँ, सहारा से आने वाली शुष्क और धूल भरी हवाएं वायुमंडल को स्थिर कर देती हैं, जिससे बादलों और तूफानों का निर्माण कठिन हो जाता है।