इस वर्ष का एल नीनो इतिहास का सबसे शक्तिशाली तूफान बन सकता है। प्रशांत महासागर के बढ़ते तापमान से वैश्विक स्तर पर बारिश, सूखे और अर्थव्यवस्था में भारी उथल-पुथल होने की आशंका है।
- प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य वृद्धि से 'सुपर एल नीनो' की स्थिति बन रही है।
- इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर बारिश के पैटर्न, कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
- भारत सहित एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भीषण सूखे का खतरा बढ़ गया है।
एल नीनो (El Niño) एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो हर कुछ वर्षों में घटित होती है। यह तब होता है जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। जब समुद्र में जमा यह अत्यधिक गर्मी वायुमंडल में मुक्त होती है, तो यह एक ऐसी श्रृंखला प्रतिक्रिया (chain reaction) शुरू करती है जो पूरी दुनिया के मौसम को बदल देती है।
सुपर एल नीनो: एक अभूतपूर्व खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब समुद्र का तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो इसे अनौपचारिक रूप से 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है। इतिहास में 1982-83, 1997-98 और 2015-16 जैसी घटनाएं विनाशकारी रही हैं। वर्तमान स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि यह घटना असाधारण गति से विकसित हो रही है।
बर्कले अर्थ (Berkeley Earth) के मॉडलिंग से पता चलता है कि NINO3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस ऊपर जा सकता है, जो 2015-16 के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा। यह वृद्धि वैश्विक तापन (Global Warming) के प्रभाव से अलग है, जो इसे और भी खतरनाक बनाती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एल नीनो केवल एक मौसम संबंधी घटना नहीं है, बल्कि एक आर्थिक आपदा भी है। 1997-98 के एल नीनो के कारण अगले पांच वर्षों में लगभग 5.7 ट्रिलियन डॉलर का संचयी नुकसान हुआ था। जब कृषि उत्पादन गिरता है और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती हैं, तो खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) वैश्विक स्तर पर बढ़ जाती है।
"समुद्र का तापमान बढ़ने से वायुमंडल का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे एक क्षेत्र में भीषण बाढ़ आती है तो दूसरे में दशकों का सबसे बुरा सूखा पड़ता है।"
वैश्विक प्रभाव और तुलना
एल नीनो का प्रभाव दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग होता है। जहाँ अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम हिस्सों में अधिक बारिश हो सकती है, वहीं इंडोनेशिया और दक्षिणी अफ्रीका में सूखे का खतरा बढ़ जाता है।
| विशेषता | एल नीनो (El Niño) | ला नीना (La Niña) |
|---|---|---|
| समुद्र का तापमान | सामान्य से अधिक (गर्म) | सामान्य से कम (ठंडा) |
| इंडोनेशिया/एशिया | सूखे का उच्च जोखिम | भारी बारिश की संभावना |
| अटलांटिक तूफान | कम सक्रिय मौसम | अधिक सक्रिय और तीव्र तूफान |
ऐतिहासिक रूप से, सुपर एल नीनो ने विनाशकारी परिणाम दिए हैं। 1982-83 में कोलोराडो रिवर बेसिन में रिकॉर्ड बर्फबारी हुई, जिससे भारी बाढ़ आई। वहीं, 2023-24 की घटना ने दक्षिणी अफ्रीका में 100 वर्षों का सबसे भीषण सूखा पैदा किया, जिससे लगभग 6.1 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता पड़ी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या एल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग एक ही हैं?
नहीं, एल नीनो एक प्राकृतिक चक्र है, जबकि ग्लोबल वार्मिंग मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला दीर्घकालिक तापमान वृद्धि है। हालांकि, ग्लोबल वार्मिंग एल नीनो के प्रभावों को और अधिक तीव्र बना सकती है।
प्रश्न 2: ला नीना क्या है?
ला नीना, एल नीनो का ठीक विपरीत है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है, जिससे मौसम के प्रभाव भी उलट जाते हैं।