तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के मलयडीपत्ति में पुरातत्वविदों ने पांचवीं शताब्दी का एक दुर्लभ वीर शिलालेख खोज निकाला है। यह खोज संगम काल के इतिहास और लिपि के विकास पर नया प्रकाश डालती है।

  • मलयडीपत्ति गाँव में एक ईंटों वाले कुएं से पांचवीं शताब्दी का वीर शिलालेख मिला।
  • शिलालेख की लिपि तमिल-ब्राह्मी से वट्टेझुत्तु के संक्रमणकालीन चरण को दर्शाती है।
  • यह शिलालेख 'नन्नंग कोडियन' की स्मृति में स्थापित किया गया प्रतीत होता है।

तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) द्वारा किए जा रहे उत्खनन के दौरान, तेनकासी जिले के करिवलमवंदनल्लूर के पास स्थित मलयडीपत्ति गाँव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। पुरातत्वविदों ने एक प्राचीन ईंटों से बने कुएं के भीतर से पांचवीं शताब्दी का एक 'वीर शिलालेख' (Hero Stone) खोज निकाला है, जो संगम काल के अंत और उसके बाद के युग का प्रतिनिधित्व करता है।

पुरातत्व विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह शिलालेख एक सीढ़ीदार ईंटों वाले कुएं में पाया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि संगम काल के दौरान उपयोग में रहने वाला यह कुआं बाद के वर्षों में अनुपयोगी हो गया था और इसे पत्थरों और ईंटों से भर दिया गया था। इसी मलबे के बीच यह महत्वपूर्ण शिलालेख सुरक्षित मिला। शिलालेख का आकार लगभग 1 मीटर लंबा और 0.30 मीटर चौड़ा है।

लिपि और ऐतिहासिक महत्व

इस खोज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी लिपि है। शिलालेख पर मौजूद लिखावट तमिल-ब्राह्मी से वट्टेझुत्तु लिपि के बीच के संक्रमणकालीन चरण को दर्शाती है। शिलालेख में चार पंक्तियाँ हैं: 'करुक्कन', 'सुलगन', 'नन्नंग' और 'कोडियन'। पुरातत्वविदों का प्रारंभिक विश्लेषण बताता है कि यह शिलालेख पांचवीं शताब्दी में 'करुक्कन सुलगन' के पुत्र 'नन्नंग कोडियन' की स्मृति में स्थापित किया गया था।

यह शिलालेख न केवल संगम कालीन सामाजिक संरचना को दर्शाता है, बल्कि दक्षिण भारतीय लिपियों के क्रमिक विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

ऐतिहासिक रूप से, संगम और संगम-पश्चात काल के दौरान, वीर शिलालेखों पर योद्धाओं की आकृतियाँ उकेरी नहीं जाती थीं। मलयडीपत्ति में मिला शिलालेख भी इसी परंपरा का पालन करता है। इससे पहले पुलिमंकॉम्बाई, अप्पनूर और मल्लिकपुरम में भी इसी तरह के शिलालेख मिले थे जिनमें योद्धाओं के चित्र नहीं थे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मलयडीपपति में चल रहा उत्खनन केवल एक पत्थर की खोज नहीं है, बल्कि यह संगम काल के दौरान स्थानीय लोगों के जीवन, व्यवसाय और व्यापारिक संबंधों को समझने का एक झरोखा है। यह खोज दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास के पुनर्लेखन में सहायक हो सकती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

संगम काल (300 ईसा पूर्व - 300 ईस्वी के आसपास) दक्षिण भारत का एक स्वर्ण युग था, जो अपनी समृद्ध साहित्य और योद्धा संस्कृति के लिए जाना जाता है। वीर शिलालेख (Nadukal) उन योद्धाओं के सम्मान में बनाए जाते थे जिन्होंने समुदाय या युद्ध में वीरता दिखाई हो।

Did You Know?: संगम काल के शिलालेखों में अक्सर योद्धाओं के नाम और उनके वंश का उल्लेख होता था, जो उस समय की वंशावली को समझने में मदद करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यह शिलालेख कहाँ पाया गया है?
उत्तर: यह तमिलनाडु के तेनकासी जिले के मलयडीपत्ति गाँव में एक प्राचीन कुएं से मिला है।

प्रश्न 2: इस शिलालेख की लिपि क्या है?
उत्तर: यह लिपि तमिल-ब्राह्मी से वट्टेझुत्तु के संक्रमणकालीन चरण को प्रदर्शित करती है।