भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज रात GSLV‑F17 रॉकेट के साथ EOS‑05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है, जिससे आठ महीने की लॉन्च दरी समाप्त होगी और जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता को पुनर्जीवित किया जाएगा।
- ISRO ने GSLV‑F17 रॉकेट के साथ EOS‑05 उपग्रह को आज रात प्रक्षेपित करने की घोषणा की।
- यह मिशन 8 महीने की लॉन्च दरी को समाप्त कर जियोसिंक्रोनस इमेजिंग को पुनः स्थापित करेगा।
- EOS‑05 भारत का पहला जियोसिंक्रोनस कक्षा में कार्य करने वाला इमेजिंग उपग्रह होगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतिश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से 4 सितंबर को 02:55 एएम IST पर GSLV‑F17 को प्रक्षेपित करने की पुष्टि की। यह रॉकेट भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन (GSLV) की 19वीं उड़ान होगी और लगभग आठ महीने की लॉन्च दरी को समाप्त करने की उम्मीद है।
‘नॉटी बॉय’ का इतिहास और वर्तमान स्थिति
GSLV‑F17 को ISRO में ‘नॉटी बॉय’ का उपनाम मिला है क्योंकि इसके शुरुआती वर्षों में कई अनपेक्षित विफलताएँ हुईं। पहले 18 उड़ानों में से छह में मिशन पूर्ण नहीं हो सका, जिससे विकास प्रक्रिया में कई बार रुकावटें आईं। इन चुनौतियों के बावजूद, ISRO ने तकनीकी सुधार और परीक्षणों के माध्यम से रॉकेट को विश्वसनीय बनाया है।
EOS‑05: जियोसिंक्रोनस इमेजिंग का नया युग
EOS‑05, जिसे GISAT‑1A भी कहा जाता है, लगभग 36,000 किमी की जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थित रहेगा, जिससे वह एक ही क्षेत्र की निरंतर निगरानी कर सकेगा। यह पारंपरिक लो‑अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों से अलग है, जो केवल समय‑समय पर ही क्षेत्र को देख पाते हैं। EOS‑05 मौसम निगरानी, आपदा प्रबंधन, कृषि, वनों की निगरानी और चक्रवात ट्रैकिंग जैसे कई अनुप्रयोगों में मदद करेगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a successful EOS‑05 launch will not only restore ISRO’s launch cadence but also position India as a leader in persistent geostationary Earth observation, a capability currently limited to a few space‑faring nations.
“GSLV‑F17 की सफल लॉन्च ISRO की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करेगी और भारत को जियोसिंक्रोनस इमेजिंग में नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।”
Frequently Asked Questions
- GSLV‑F17 मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- EOS‑05 उपग्रह किन प्रमुख सेवाओं के लिए उपयोग किया जाएगा?
पहले GISAT‑1 मिशन (GSLV‑F10, अगस्त 2021) में क्रायोजेनिक स्टेज की खराबी के कारण उपग्रह कक्षा में नहीं पहुँच सका था। इस बार ISRO ने तकनीकी सुधारों के साथ दोबारा प्रयास किया है, जिससे भारत की जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता को साकार करने की उम्मीद है।