हैदराबाद स्थित CSIR‑IICT के वैज्ञानिकों ने सूर्य की रोशनी और समुद्री जल से हाइड्रोजन उत्पन्न करने के लिए एक कम लागत वाले कॉपर‑टाइटेनियम डाइऑक्साइड फोटोकेटालिस्ट का विकास किया है। यह खोज महंगे धातुओं पर निर्भरता घटाकर हरी ऊर्जा को अधिक सुलभ बनाती है।
- कॉपर‑आधारित फोटोकेटालिस्ट से महंगे धातुओं की आवश्यकता घटती है।
- कैटालिस्ट का संरचनात्मक परिवर्तन सूर्य और समुद्री जल में सक्रियता बढ़ाता है।
- लंबी अवधि का प्रदर्शन सूर्य की तीव्रता और समुद्री खनिजों पर निर्भर करता है।
हैदराबाद के CSIR‑Indian Institute of Chemical Technology (CSIR‑IICT) में वैज्ञानिकों ने सूर्य की रोशनी और समुद्री जल का उपयोग करके हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक नया, सस्ता कॉपर‑आधारित फोटोकेटालिस्ट तैयार किया। यह खोज हाइड्रोजन को एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में अपनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह पारंपरिक रूप से उपयोग होने वाले दुर्लभ धातुओं की जगह कॉपर का प्रयोग करता है।
टीम के प्रमुख वैज्ञानिक, उjjwal पॉल और शोध छात्र भव्य जाकसानी ने कॉपर‑टाइटेनियम डाइऑक्साइड के साथ प्रयोग किये और पाया कि सूर्य के संपर्क में आने पर कैटालिस्ट का ऑक्सीकरण अवस्था लगातार बदलती है। इस परिवर्तन से कैटालिस्ट की विद्युत आवेश प्रवाह क्षमता बढ़ती है, जिससे हाइड्रोजन उत्पादन दक्षता में सुधार होता है।
कैटालिस्ट में कॉपर के समावेश से टाइटेनियम डाइऑक्साइड के ढाँचे में सूक्ष्म दोष उत्पन्न होते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक चार्ज ट्रांसपोर्ट को तेज करते हैं और सौर ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करने में सहायता करते हैं। इस दोष-जनित सक्रियता के कारण, प्रयोगशाला में उत्पन्न हाइड्रोजन की मात्रा पारंपरिक कैटालिस्ट से काफी अधिक रही।
अध्ययन ने यह भी उजागर किया कि कैटालिस्ट का दीर्घकालिक प्रदर्शन केवल उसके रासायनिक गुणों पर ही नहीं, बल्कि बाहरी कारकों जैसे कि सूर्य की तीव्रता और समुद्री जल में मौजूद आयन पर भी निर्भर करता है। समुद्री जल के प्राकृतिक खनिजों ने कैटालिस्ट की सतह के साथ परस्पर क्रिया को प्रभावित किया, जिससे समग्र दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
इन निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि फोटोकेटालिस्ट का व्यवहार स्थिर नहीं है, बल्कि यह प्रतिक्रिया के दौरान निरंतर विकसित होता है। इस गतिशील परिवर्तन को समझना और नियंत्रित करना बड़े पैमाने पर समुद्री जल आधारित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए अधिक स्थिर और टिकाऊ कैटालिस्ट डिजाइन करने में मदद करेगा।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार का कॉपर‑आधारित कैटालिस्ट, जो महंगे धातुओं पर निर्भर नहीं है, हाइड्रोजन उत्पादन को आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनाता है। यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर लागू की जाती है, तो यह वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, विशेषकर तटीय क्षेत्रों में जहाँ समुद्री जल की प्रचुरता है।
“हमें यह समझना होगा कि कैटालिस्ट का संरचनात्मक विकास कैसे होता है ताकि हम अधिक कुशल और स्केलेबल समुद्री जल‑से‑हाइड्रोजन तकनीक बना सकें।” – उjjwal पॉल, CSIR‑IICT के प्रमुख वैज्ञानिक।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या यह तकनीक अभी भी प्रयोगशाला स्तर पर है?
A1: हाँ, शोध अभी प्रयोगशाला चरण में है, पर टीम इसे समुद्री जल आधारित सौर फोटोरेएक्टर में रूपांतरित करने पर कार्य कर रही है।
Q2: क्या यह तकनीक सभी प्रकार के समुद्री जल पर कार्य करेगी?
A2: शोध से पता चलता है कि समुद्री जल में मौजूद खनिजों का संतुलन महत्वपूर्ण है; इसलिए विभिन्न तटीय क्षेत्रों में परीक्षण आवश्यक होंगे।