बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप प्रनोस फ्यूजन ने भारत के पहले निजी टोकामक 'PRAGYA' में सफलतापूर्वक प्लाज्मा उत्पन्न किया है। यह उपलब्धि भारत को स्वच्छ और असीमित ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर खड़ा करती है।
- बेंगलुरु की प्रनोस फ्यूजन ने भारत का पहला निजी टोकामक 'PRAGYA' विकसित किया।
- मशीन ने पहली बार प्लाज्मा उत्पन्न कर न्यूक्लियर फ्यूजन की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की।
- कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 'PraniQ' नामक नेट एनर्जी गेन रिएक्टर बनाना है।
भारत ने परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप प्रनोस फ्यूजन (Pranos Fusion) ने अपने स्वदेशी रूप से विकसित टोकामक, PRAGYA, में पहली बार प्लाज्मा बनाने में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला ऐसा रिएक्टर है जो 'कृत्रिम सूरज' बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
PRAGYA टोकामक, जिसकी त्रिज्या लगभग 40 सेंटीमीटर है, को मात्र 8 महीनों के कठिन परिश्रम के बाद तैयार किया गया है। यह मशीन वर्तमान में बिजली उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि एक शोध उपकरण के रूप में कार्य करेगी। कंपनी की योजना इसे अगले 20 वर्षों तक संचालित करने की है, जिसमें प्रतिदिन 10 से 12 प्लाज्मा शॉट लिए जाएंगे। इस प्रक्रिया से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य के बड़े और शक्तिशाली फ्यूजन रिएक्टरों के डिजाइन को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
टोकामक क्या है और यह कैसे काम करता है?
टोकामक एक डोनट के आकार की मशीन होती है जिसमें अत्यधिक गर्म प्लाज्मा को शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों (Magnetic Fields) के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। न्यूक्लियर फ्यूजन में, हल्के परमाणुओं (जैसे हाइड्रोजन) को अत्यधिक उच्च तापमान पर आपस में जोड़ा जाता है, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही वह प्रक्रिया है जो हमारे सूर्य और अन्य तारों को ऊर्जा प्रदान करती है। धरती पर इस प्रक्रिया को नियंत्रित करना विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, प्रनोस फ्यूजन का यह कदम भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है। जहाँ वर्तमान परमाणु रिएक्टर 'फिशन' (विभाजन) पर आधारित हैं, वहीं 'फ्यूजन' (संलयन) सुरक्षित है और इसमें रेडियोधर्मी कचरा न के बराबर होता है। यदि भारत 2030 तक नेट एनर्जी गेन हासिल कर लेता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में गेम-चेंजर होगा।
"प्लाज्मा का सफल नियंत्रण ही वह कुंजी है जो मानवता को असीमित और कार्बन-मुक्त ऊर्जा की ओर ले जाएगी।"
PRAGYA का मुख्य उद्देश्य केवल तकनीक का परीक्षण करना नहीं है, बल्कि भारत में प्लाज्मा भौतिकविदों और फ्यूजन वैज्ञानिकों की एक नई पीढ़ी तैयार करना भी है। कंपनी हाई टेम्परेचर सुपरकंडक्टिंग (HTS) मैग्नेट पर काम कर रही है, जिसे 2027 तक चालू करने का लक्ष्य है। इसके बाद, 2030 तक PraniQ रिएक्टर का निर्माण किया जाएगा, जिसका लक्ष्य 'नेट एनर्जी गेन' प्राप्त करना है—अर्थात रिएक्टर को चलाने में लगी ऊर्जा से अधिक ऊर्जा का उत्पादन करना।
| विशेषता | PRAGYA (वर्तमान) | PraniQ (लक्ष्य 2030) |
|---|---|---|
| उद्देश्य | डेटा संग्रह और परीक्षण | नेट एनर्जी उत्पादन |
| प्रकार | कॉम्पैक्ट टोकामक | एनर्जी गेन रिएक्टर |
| मुख्य फोकस | प्लाज्मा कंट्रोल | व्यावसायिक ऊर्जा उत्पादन |
Frequently Asked Questions
1. क्या PRAGYA अभी बिजली पैदा कर रहा है?
नहीं, PRAGYA एक परीक्षण मशीन (Test Bed) है जिसका उपयोग डेटा इकट्ठा करने और प्लाज्मा नियंत्रण सीखने के लिए किया जा रहा है।
2. नेट एनर्जी गेन का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि फ्यूजन प्रक्रिया से जितनी ऊर्जा उत्पन्न हो, वह उस ऊर्जा से अधिक हो जो प्लाज्मा को गर्म करने और चुंबकीय क्षेत्र बनाने में खर्च की गई थी।