आर्टेमिस II मिशन के कमांडर रीड वाइजमैन और पायलट विक्टर ग्लोवर अब सक्रिय अंतरिक्ष उड़ानों से दूर रहेंगे। वे 'एमेरिटस एस्ट्रोनॉट्स' के रूप में भविष्य के चंद्रमा मिशनों के लिए मार्गदर्शन करेंगे।

  • रीड वाइजमैन और विक्टर ग्लोवर सक्रिय अंतरिक्ष उड़ान से हटकर मेंटरशिप भूमिका में आए हैं।
  • आर्टेमिस II क्रू से अब केवल क्रिस्टीना कोच ही सक्रिय ड्यूटी पर हैं।
  • विक्टर ग्लोवर कैलिफोर्निया पॉलिटेक्निक स्टेट यूनिवर्सिटी में नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे।
  • यह निर्णय अप्रैल में चंद्रमा के ऐतिहासिक चक्कर लगाने के बाद लिया गया है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने घोषणा की है कि आर्टेमिस II मिशन के कमांडर रीड वाइजमैन और पायलट विक्टर ग्लोवर अब सक्रिय अंतरिक्ष उड़ानों (active spaceflight) से दूर हो रहे हैं। हालांकि, वे पूरी तरह से अलग नहीं हो रहे हैं, बल्कि 'एमेरिटस एस्ट्रोनॉट्स' के रूप में चंद्र कार्यक्रम का समर्थन करना जारी रखेंगे, जहाँ वे भविष्य के चंद्रमा मिशनों के लिए नए अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित और मार्गदर्शन करेंगे।

यह बदलाव उस समय आया है जब अप्रैल में आर्टेमिस II ने चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा की परिक्रमा की थी और मानवता के लिए दूरी का एक नया रिकॉर्ड बनाया था। जुलाई में कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी से जेरेमी हैनसेन के सेवानिवृत्त होने के बाद, अब क्रिस्टीना कोच ही एकमात्र ऐसी सदस्य हैं जो आर्टेमिस II क्रू से सक्रिय ड्यूटी पर बची हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह कदम यह दर्शाता है कि नासा अब 'खोज' के चरण से निकलकर 'संस्थागत' चरण की ओर बढ़ रहा है। वाइजमैन और ग्लोवर जैसे अनुभवी दिग्गजों को मेंटर के रूप में रखकर, नासा यह सुनिश्चित कर रहा है कि गहरे अंतरिक्ष की चुनौतियों का वास्तविक अनुभव अगली पीढ़ी तक पहुंचे। सिमुलेशन और ट्रेनिंग से वह अनुभव नहीं मिल सकता जो वास्तव में चंद्रमा की कक्षा में रहने से मिलता है।

मिशन लीडर्स का मेंटरशिप भूमिका में आना आर्टेमिस प्रोग्राम को एक स्थायी चंद्र उपस्थिति में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विक्टर ग्लोवर ने अपनी शिक्षा प्राप्त करने वाले संस्थान, कैलिफोर्निया पॉलिटेक्निक स्टेट यूनिवर्सिटी (Cal Poly) में एक नेतृत्व भूमिका संभाल ली है। 1 सितंबर से प्रभावी इस भूमिका में, वे छात्रों को विज्ञान और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रेरित करेंगे। ग्लोवर ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मानवता को एकजुट होने का संदेश दिया था, जिसमें उन्होंने पृथ्वी को ब्रह्मांड के "शून्य में एक नखलिस्तान" बताया था।

वहीं, रीड वाइजमैन, जो एक सेवानिवृत्त नेवी कैप्टन और पूर्व मुख्य अंतरिक्ष यात्री रहे हैं, ने 2014 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पांच महीने बिताए थे। मिशन के दौरान उन्होंने एक भावनात्मक अपील की थी कि चंद्रमा के एक क्रेटर का नाम उनकी दिवंगत पत्नी कैरोल के नाम पर रखा जाए, जिनका 2020 में कैंसर से निधन हो गया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आर्टेमिस कार्यक्रम 1960 और 70 के दशक के अपोलो मिशनों का उत्तराधिकारी है। जहाँ अपोलो का लक्ष्य चंद्रमा पर पहुँचना था, वहीं आर्टेमिस का लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थायी आधार बनाना है, ताकि भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजे जा सकें। आर्टेमिस II मिशन ने गहरे अंतरिक्ष में ओरियन अंतरिक्ष यान की जीवन-रक्षक प्रणालियों की प्रभावशीलता को साबित किया।

क्या आप जानते हैं?: आर्टेमिस II मिशन ने मानव इतिहास में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड बनाया था।
अंतरिक्ष यात्रीआर्टेमिस II भूमिकानया स्टेटसमुख्य योगदान
रीड वाइजमैनकमांडरएमेरिटस मेंटरडीप स्पेस लीडरशिप
विक्टर ग्लोवरपायलटएमेरिटस / अकादमिकSTEM वकालत और नेविगेशन
क्रिस्टीना कोचमिशन स्पेशलिस्टसक्रिय ड्यूटीनिरंतर चंद्र संचालन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रीड वाइजमैन और विक्टर ग्लोवर फिर से अंतरिक्ष में जाएंगे?
चूंकि वे अब एमेरिटस स्टेटस में हैं और सक्रिय उड़ान से हट चुके हैं, इसलिए उनके भविष्य के मिशनों में शामिल होने की संभावना नहीं है, लेकिन वे मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।

आर्टेमिस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य मनुष्यों को फिर से चंद्रमा पर ले जाना, वहां स्थायी आधार बनाना और मंगल ग्रह के लिए तैयारी करना है।