स्विस शोधकर्ताओं ने पिघलते ग्लेशियरों को बचाने के लिए प्लास्टिक के बजाय भेड़ की ऊन के कंबल का उपयोग करने का एक अभिनव और पर्यावरण-अनुकूल तरीका खोजा है।
- स्विस वैज्ञानिकों ने त्सानफ्लेउरॉन ग्लेशियर पर भेड़ की ऊन के कंबल का परीक्षण किया।
- ऊन के कंबल प्लास्टिक की चादरों के समान ही प्रभावी पाए गए और पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल हैं।
- यह प्रयोग स्विट्जरलैंड में बर्बाद होने वाली 40-70% ऊन का पुन: उपयोग करने का एक तरीका है।
जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी दुनिया में, विशेष रूप से आल्प्स पर्वतमाला में, ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ लॉज़ेन और समिट फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने एक अपरंपरागत दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने प्लास्टिक की सिंथेटिक चादरों के विकल्प के रूप में भेड़ की ऊन से बने कंबलों का परीक्षण किया है।
इस परियोजना, जिसे 'Keep It Wool' नाम दिया गया है, का मुख्य उद्देश्य बर्फ के नुकसान को धीमा करने के लिए एक ऐसा तरीका खोजना है जो प्रकृति को नुकसान न पहुँचाए। पारंपरिक रूप से, ग्लेशियरों के छोटे हिस्सों को बचाने के लिए प्लास्टिक के टारपॉलिन का उपयोग किया जाता है, जो सूर्य की रोशनी को परावर्तित करते हैं और गर्मी को बर्फ तक पहुँचने से रोकते हैं। हालांकि, ये प्लास्टिक शीट पर्यावरण में माइक्रोफाइबर छोड़ती हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रयोग केवल ग्लेशियर बचाने के बारे में नहीं है, बल्कि अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में भी है। स्विट्जरलैंड में हर साल लगभग 40% से 70% ऊन बेकार चली जाती है। इस बेकार संसाधन को पर्यावरण संरक्षण में बदलना एक 'सर्कुलर इकोनॉमी' का उत्कृष्ट उदाहरण है।
"ऊन के कंबलों ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया और प्लास्टिक के समान ही प्रभावशीलता दिखाई, जो इसे एक टिकाऊ विकल्प बनाता है।"
जून के महीने में, शोधकर्ताओं ने फिसोलन (Fisolan) कंपनी द्वारा निर्मित दो प्रोटोटाइप ऊन के कंबलों को त्सानफ्लेउरॉन ग्लेशियर के 200 वर्ग मीटर क्षेत्र पर फैलाया। पूरे गर्मियों के दौरान हर दो सप्ताह में किए गए मापों से पता चला कि ऊन के कंबल, विशेष रूप से मोटे वाले, सिंथेटिक जियोटेक्सटाइल की तुलना में थोड़े अधिक प्रभावी थे।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि यह कोई जादुई समाधान नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर क्षेत्र का केवल 0.02% हिस्सा ही चादरों से ढका हुआ है। इतने बड़े पैमाने पर पिघलती बर्फ के लिए दुनिया में कोई ऐसा कंबल नहीं है जो पूरे ग्लेशियर को ढक सके।
| विशेषता | सिंथेटिक चादरें | भेड़ की ऊन के कंबल |
|---|---|---|
| पर्यावरण प्रभाव | माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण | बायोडिग्रेडेबल (प्राकृतिक) |
| प्रभावशीलता | उच्च | उच्च (मोटे ऊन में बेहतर) |
| संसाधन स्रोत | पेट्रोकेमिकल आधारित | अपशिष्ट ऊन का पुन: उपयोग |
अंततः, शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक पर्यटन स्थलों और बर्फ प्रबंधन क्षेत्रों में प्लास्टिक को बदलने के लिए आदर्श है। लेकिन ग्लेशियरों के व्यापक विनाश को रोकने का एकमात्र दीर्घकालिक तरीका ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या ऊन के कंबल पूरे ग्लेशियर को बचा सकते हैं?
उत्तर: नहीं, यह केवल छोटे क्षेत्रों (जैसे पर्यटन स्थलों) के लिए प्रभावी है। पूरे ग्लेशियर को ढकना असंभव है।
प्रश्न 2: ऊन प्लास्टिक से बेहतर क्यों है?
उत्तर: क्योंकि ऊन बायोडिग्रेडेबल है और प्लास्टिक की तरह हानिकारक माइक्रोफाइबर नहीं छोड़ती है।