ALMA टेलीस्कोप का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने दो विशाल प्रोटोटार्स को देखा है जो मात्र 60 साल पहले एक संयोगवश मिलन के बाद एक बाइनरी सिस्टम बन गए। यह खोज सितारों के जन्म की पुरानी मान्यताओं को चुनौती देती है।

  • IRAS 07299−1651 सिस्टम में दो विशाल सितारों ने केवल 60 साल पहले एक-दूसरे को अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति से पकड़ा।
  • ये सितारे एक ही गैस बादल से नहीं बने, बल्कि अलग-अलग पैदा हुए और बाद में मिले।
  • इस शोध के लिए ALMA, JWST और VLT जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोपों का उपयोग किया गया।

खगोलशास्त्रियों ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जहाँ उन्होंने वास्तविक समय में एक विशाल स्टेलर बाइनरी सिस्टम के जन्म को देखा है। Atacama Large Millimeter/submillimeter Array (ALMA) रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पाया कि लगभग 5,300 प्रकाश वर्ष दूर स्थित IRAS 07299−1651 सिस्टम में दो विशाल प्रोटोटार्स (नन्हे सितारे) हाल ही में एक साथ आए हैं।

दशकों से यह माना जाता था कि बाइनरी स्टार्स—वे सितारे जो एक साझा केंद्र के चारों ओर घूमते हैं—एक ही गैस और धूल के बादल के टूटने से बनते हैं। लेकिन IRAS 07299−1651 से मिले आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। ये दो सितारे अलग-अलग गैस के बादलों में पैदा हुए थे और एक आकस्मिक गुरुत्वाकर्षण मुठभेड़ के कारण एक-दूसरे के करीब आए। मानव समय पैमाने पर ऐसी घटना को देखना अत्यंत दुर्लभ है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह खोज सितारों के विकास की हमारी समझ को मौलिक रूप से बदल देती है। जबकि हमारे सूर्य जैसे लगभग 50% सितारों का एक साथी सितारा होता है, विशाल सितारों के मामले में यह प्रतिशत 90% तक बढ़ जाता है। चूंकि विशाल सितारे अंततः सुपरनोवा बनकर फटते हैं, वे पूरी आकाशगंगा की रासायनिक संरचना को आकार देते हैं। इसलिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये प्रणालियाँ कैसे बनती हैं।

शंघाई जिओतोंग यूनिवर्सिटी के यिचेन झांग के नेतृत्व में टीम ने आठ वर्षों तक इस सिस्टम की मैपिंग की। उन्होंने ALMA और वेरी लार्ज एरे (VLA) के रेडियो डेटा को जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) और वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) की इन्फ्रारेड छवियों के साथ जोड़ा। इस बहु-स्पेक्ट्रमी दृष्टिकोण ने उन्हें सितारों की कक्षाओं और उनके चारों ओर घूमने वाली डिस्क की 3D संरचना बनाने में मदद की।

"यह अध्ययन दर्शाता है कि सितारों का प्रारंभिक जीवन काफी अराजक हो सकता है, जहाँ एक संयोगवश मुलाकात उन्हें इस गुरुत्वाकर्षण नृत्य और जुड़ाव की ओर ले जाती है।"

इस 'कैप्चर' सिद्धांत का सबसे बड़ा सबूत सितारों के चारों ओर मौजूद डिस्क का गलत संरेखण (misalignment) था। यदि ये सितारे एक ही बादल से बने होते, तो उनकी डिस्क एक ही दिशा में होतीं। इसके विपरीत, ये डिस्क एक-दूसरे के सापेक्ष और उनकी कक्षा के सापेक्ष तीव्र कोण पर झुकी हुई हैं। इसके अलावा, उनकी कक्षाएं गोलाकार होने के बजाय अत्यधिक चपटी या परवलयिक (parabolic) पाई गईं।

सितारों की कक्षाओं का विश्लेषण करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि यह मिलन लगभग 60 साल पहले हुआ था। ब्रह्मांडीय समय के पैमाने पर यह एक पल के समान है। यह तथ्य कि सितारों के चारों ओर की डिस्क इस टकराव के बाद भी सुरक्षित रहीं, एक सटीक लेकिन हिंसक गुरुत्वाकर्षण प्रक्रिया की ओर इशारा करता है।

विशेषता सामान्य बाइनरी निर्माण IRAS 07299−1651 (कैप्चर)
उत्पत्ति एक ही गैस बादल दो अलग-अलग बादल
डिस्क संरेखण समानांतर/एक दिशा में गलत संरेखित/झुकी हुई
कक्षा का आकार लगभग गोलाकार अत्यधिक विलक्षण/परवलयिक
क्या आप जानते हैं?: विशाल सितारे ब्रह्मांड के 'भारी निर्माता' होते हैं, जो अपने सुपरनोवा विस्फोटों के दौरान सोना और प्लेटिनम जैसे भारी तत्वों का निर्माण करते हैं।

क्या ये दो सितारे हमेशा साथ रहेंगे?
यह अभी स्पष्ट नहीं है। उनका भविष्य आसपास की गैसों के साथ होने वाली प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करता है, जो या तो उनकी कक्षा को स्थिर कर सकती हैं या उन्हें अलग कर सकती हैं।

यह सिस्टम पृथ्वी से कितनी दूर है?
IRAS 07299−1651 सिस्टम हमारे सौर मंडल से लगभग 5,300 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।