जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ETH ज्यूरिख और व्रीजे यूनिवर्सिटी ब्रुसेल्स द्वारा विकसित एक नए डिजिटल टूल के जरिए अब यह पता लगाया जा सकता है कि कौन सा ग्लेशियर कब तक पूरी तरह विलुप्त हो जाएगा।

  • 'ग्लोबल ग्लेशियर एक्सटिंक्शन एक्सप्लोरर' टूल व्यक्तिगत ग्लेशियरों के विलुप्त होने की तारीखों का अनुमान लगाता है।
  • 1.5°C की वार्मिंग पर 2100 तक लगभग 50% ग्लेशियर बच सकते हैं, जबकि 4°C पर 10% से भी कम।
  • नेपाल और तिब्बत में हालिया ग्लेशियर फटने से 1,300 से अधिक लोगों की जान गई, जो जलवायु अस्थिरता का प्रमाण है।

पर्वतों की चोटियों पर जमी बर्फ केवल प्राकृतिक सुंदरता का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। हालांकि, हाल के वर्षों में हिमालय से लेकर आल्प्स तक, ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार ने वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया है। अगस्त 2026 में स्विट्जरलैंड के बेला टोला ग्लेशियर के विलुप्त होने की घोषणा इस बात का प्रमाण है कि यह संकट अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है।

हाल ही में ETH ज्यूरिख और व्रीजे यूनिवर्सिटी ब्रुसेल्स के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी इंटरैक्टिव वेबसाइट 'ग्लोबल ग्लेशियर एक्सटिंक्शन एक्सप्लोरर' लॉन्च की है। यह टूल केवल कुल बर्फ के नुकसान के आंकड़ों को नहीं दिखाता, बल्कि उपयोगकर्ताओं को विशिष्ट ग्लेशियरों को खोजने और विभिन्न ग्लोबल वार्मिंग परिदृश्यों के तहत उनके अस्तित्व की समयसीमा देखने की अनुमति देता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह डेटा महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्लेशियरों का पिघलना केवल समुद्र के स्तर को नहीं बढ़ाता, बल्कि उन करोड़ों लोगों के लिए जल संकट पैदा करता है जो नदियों के लिए इन ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। जब एक ग्लेशियर विलुप्त होता है, तो वह केवल बर्फ का नुकसान नहीं होता, बल्कि एक पूरे क्षेत्रीय जल चक्र का विनाश होता है।

"हर एक डिग्री का अंश मायने रखता है; 1.5°C तक वार्मिंग को सीमित करना 2.7°C की तुलना में दोगुने से अधिक ग्लेशियरों को बचा सकता है।" - लैंडर वैन ट्रिच्ट, मुख्य लेखक।

नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से आई विनाशकारी बाढ़, जिसमें 1,300 से अधिक लोग मारे गए, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अस्थिर हिमालयी वातावरण अब जानलेवा साबित हो रहा है। शोध बताते हैं कि ग्लेशियरों के विलुप्त होने की दर इस सदी के मध्य (लगभग 2040-2050) तक अपने चरम पर पहुंच सकती है।

वार्मिंग परिदृश्य (Warming Scenario) 2100 तक जीवित बचने वाले ग्लेशियर (%) वार्षिक विलुप्ति दर (Peak)**
1.5°C ~50% 2,000/वर्ष (2041)
2.7°C ~20% मध्यम
4.0°C < 10% 4,000/वर्ष (2050s)

वैज्ञानिकों का तर्क है कि ग्लेशियर किसी एक गर्म गर्मी के कारण नहीं पिघलते, बल्कि यह वर्षों तक बर्फ के संचय में कमी और तापमान में निरंतर वृद्धि का परिणाम है। स्विट्जरलैंड में रोन ग्लेशियर को बचाने के लिए सफेद चादरों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी उपाय है।

क्या आप जानते हैं?: ग्लेशियरों को 'पृथ्वी के एयर कंडीशनर' कहा जाता है क्योंकि वे सूर्य की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित करके वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. ग्लोबल ग्लेशियर एक्सटिंक्शन एक्सप्लोरर क्या है?
यह एक इंटरैक्टिव मानचित्र है जो यह अनुमान लगाता है कि ग्लोबल वार्मिंग के विभिन्न स्तरों के आधार पर दुनिया का कौन सा ग्लेशियर कब तक खत्म हो जाएगा।

2. क्या ग्लेशियरों का विलुप्त होना रोका जा सकता है?
हाँ, यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखा जाए, तो दुनिया के आधे ग्लेशियरों को बचाया जा सकता है।