खुरपका और मुंह का रोग (FMD) का SAT-1 सीरोटाइप दशकों बाद नए क्षेत्रों में पाया गया है, जिससे वैश्विक पशुधन और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा हो गया है। जानिए यह बीमारी क्या है और भारत के नियंत्रण कार्यक्रम क्या हैं।
- FMD एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो पशुओं के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचाती है।
- SAT-1 सीरोटाइप, जो पारंपरिक रूप से अफ्रीका तक सीमित था, अब यूरोप और मध्य पूर्व के नए क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
- इस बीमारी का कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है; प्रबंधन मुख्य रूप से टीकाकरण और जैव-सुरक्षा पर निर्भर है।
- भारत का NADCP कार्यक्रम FMD और ब्रुसेलोसिस के उन्मूलन के लिए समर्पित एक केंद्रीय योजना है।
पिछले छह दशकों के बाद, खुरपका और मुंह का रोग (Foot-and-Mouth Disease - FMD) के एक विशिष्ट सीरोटाइप, SAT-1, के पुनरुत्थान ने वैश्विक पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है। यह वायरस न केवल उन क्षेत्रों में फैल रहा है जहाँ यह पहले कभी नहीं देखा गया, बल्कि यह यूरोप और मध्य पूर्व के उन हिस्सों में भी दस्तक दे रहा है जहाँ यह दशकों से अनुपस्थित था।
FMD एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से खुर वाले जानवरों जैसे गाय, भैंस, सूअर, भेड़ और बकरियों को प्रभावित करती है। यह वायरस केवल संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से ही नहीं, बल्कि दूषित वाहनों, उपकरणों, जूतों और पशु उत्पादों के माध्यम से भी फैल सकता है। संक्रमित जानवरों में बुखार, मुंह और पैरों के आसपास छाले और लार टपकने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जिससे दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, SAT-1 का प्रसार केवल एक पशु स्वास्थ्य मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर आर्थिक खतरा है। पशुधन की उत्पादकता में कमी, प्रजनन क्षमता में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध वैश्विक खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका को अस्थिर कर सकते हैं।
FMD का कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है; प्रबंधन मुख्य रूप से सहायक देखभाल और पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा अनुशंसित रोग-नियंत्रण उपायों पर केंद्रित है।
SAT-1 का इतिहास और प्रसार: SAT-1 को पहली बार 1948 में पहचाना गया था और यह पारंपरिक रूप से दक्षिणी अफ्रीका से जुड़ा था। विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के अनुसार, 2025 में इराक, कुवैत, मिस्र और अज़रबैजान में इसके मामले सामने आए, जबकि 2026 में चीन, मंगोलिया, इज़राइल और साइप्रस जैसे देशों में इसके पहले मामले दर्ज किए गए।
भारत की सुरक्षा रणनीति: NADCP
भारत सरकार ने इस तरह की बीमारियों से निपटने के लिए 2019 में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) शुरू किया था। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जहाँ केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100% धन उपलब्ध कराती है। इसका मुख्य उद्देश्य टीकाकरण के माध्यम से FMD और ब्रुसेलोसिस के प्रसार को रोकना और अंततः इन्हें समाप्त करना है।
| विशेषता | FMD (SAT-1) | ब्रुसेलोसिस (Brucellosis) |
|---|---|---|
| कारक | वायरस (Virus) | बैक्टीरिया (Brucella abortus) |
| मुख्य प्रभाव | मुंह और पैरों में छाले, दूध में कमी | गर्भाधान में समस्या, गर्भपात |
| नियंत्रण विधि | टीकाकरण और जैव-सुरक्षा | टीकाकरण और प्रबंधन |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या FMD मनुष्यों में फैलता है?
उत्तर: नहीं, FMD मुख्य रूप से पशुओं की बीमारी है। मनुष्यों के लिए खतरा स्वास्थ्य से अधिक आर्थिक और खाद्य आपूर्ति से संबंधित है।
प्रश्न 2: SAT-1 का प्रसार क्यों चिंताजनक है?
उत्तर: क्योंकि यह उन भौगोलिक क्षेत्रों में फैल रहा है जहाँ इसकी प्रतिरक्षा (immunity) नहीं है, जिससे बड़े पैमाने पर प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है।