युन्नान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पेरोव्स्काइट सोलर सेल विकसित किए हैं जो पानी के नीचे भी कुशलतापूर्वक काम कर सकते हैं, जिससे समुद्री ऊर्जा का नया द्वार खुल गया है।

  • पेरोव्स्काइट सोलर सेल सिलिकॉन की तुलना में सस्ते और अधिक कुशल हैं।
  • ये सेल पानी के नीचे विभिन्न प्रकाश तरंगदैर्ध्य (wavelengths) को सोखने के लिए ट्यून किए जा सकते हैं।
  • ठंडा तापमान और कम रोशनी इन सेल्स की उम्र बढ़ाने में मदद कर सकती है।

एक समय था जब सौर ऊर्जा केवल सूर्य के सीधे प्रकाश तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन विज्ञान की एक नई उपलब्धि ने इस धारणा को बदल दिया है। युन्नान विश्वविद्यालय में सिमिन मा के नेतृत्व में एक शोध टीम ने ऐसे उन्नत पेरोव्स्काइट (Perovskite) सौर सेल विकसित किए हैं जो पानी के भीतर भी बिजली उत्पन्न करने में सक्षम हैं। यह खोज समुद्री अन्वेषण और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है।

पारंपरिक सिलिकॉन सौर पैनलों के विपरीत, पेरोव्स्काइट सेल अपनी लचीली, पतली और पारदर्शी प्रकृति के कारण बहुत आकर्षक हैं। ये सेल सौर ऊर्जा को बिजली में बदलने में सिलिकॉन की तुलना में काफी अधिक कुशल होते हैं और इन्हें बनाना भी सस्ता है। हालांकि, इनकी सबसे बड़ी चुनौती इनकी अस्थिरता रही है, क्योंकि नमी और गर्मी इन्हें जल्दी खराब कर देती है।

पानी के नीचे काम करने का विज्ञान

पानी सूर्य के प्रकाश की उन तरंगदैर्ध्य (wavelengths) को तेजी से सोख लेता है जिनका उपयोग सामान्य सिलिकॉन पैनल करते हैं। लेकिन पेरोव्स्काइट का एक अनूठा गुण यह है कि इन्हें विशिष्ट प्रकाश तरंगों के साथ काम करने के लिए 'ट्यून' किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ऐसे सेल डिजाइन किए हैं जो गहरे नीले समुद्र के भीतर मौजूद विशिष्ट प्रकाश स्पेक्ट्रम का उपयोग करके बिजली बना सकते हैं।

पेरोव्स्काइट की क्षमता को प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के अनुसार ढालना ही इसे गहरे समुद्र का भविष्य बनाता है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह तकनीक केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुद्री सेंसर, स्वायत्त अंडरवाटर वाहनों (AUVs) और गहरे समुद्र के अनुसंधान केंद्रों को बिना किसी बाहरी ईंधन के संचालित करने में मदद करेगी। दिलचस्प बात यह है कि समुद्र की कम रोशनी और ठंडा तापमान इन सेल्स के क्षरण (degradation) को कम करने में भी सहायक हो सकता है, जो उनकी उम्र बढ़ाएगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सौर ऊर्जा का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन सिलिकॉन का प्रभुत्व हमेशा से रहा है। पेरोव्स्काइट्स का उपयोग हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है क्योंकि वे अगली पीढ़ी की सौर तकनीक माने जाते हैं, बशर्ते उनकी स्थायित्व की समस्या को हल किया जा सके।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: पेरोव्स्काइट सेल सिलिकॉन से बेहतर क्यों हैं?
उत्तर: ये सस्ते हैं, अधिक लचीले हैं और ऊर्जा रूपांतरण में अधिक कुशल हैं।

प्रश्न 2: क्या ये सेल गहरे समुद्र में काम करेंगे?
उत्तर: हाँ, क्योंकि इन्हें पानी के नीचे उपलब्ध विशिष्ट प्रकाश तरंगों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

Did You Know?: पेरोव्स्काइट सामग्री का नाम स्वीडिश रसायनशास्त्री लियोनार्ड पेरोव्स्की के नाम पर रखा गया है।