अर्जेंटीना की 3-2 जीत के बाद केरल के फुटबॉल प्रशंसकों में दो ध्रुवीय राय उभरीं। कुछ इसे मेस्सी की अद्भुत जीत मानते हैं, तो अन्य इसे रेफ़री के पक्षपात का नतीजा समझते हैं।

फिफा विश्व कप के प्रीक्वार्टर‑फ़ाइनल में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से मात दी, जिससे केरल के फुटबॉल प्रेमियों के बीच तीव्र बहस छिड़ गई। थिरुवनंतपुरम के बार्टन हिल्स में भीड़ ने अपने टीमों को समर्थन दिया, पर अर्जेंटीना के इस ‘ग्रेट एस्केप’ को लेकर सोशल मीडिया पर दोहरी प्रतिक्रियाएँ देखी गईं।

मैच का रोमांच और मेस्सी की चमक

लियोनेल मेस्सी ने आख़िरी दस मिनट में दो गोल कर टीम को दो गोल की पाछड़ से जीत की ओर ले गया। कई केरल के प्रशंसक इसे "स्पोर्ट्स सिनेमा" कहते हुए, मेस्सी के व्यक्तिगत प्रदर्शन को इतिहास के सबसे बेहतरीन में गिना। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "यह 10 मिनट का जादू ही नहीं, बल्कि खेल की आत्मा है।"

रेफ़री पर आरोप और मीम्स की बौछार

वहीं, एक समूह ने फ्रेंच रेफ़री फ्रांस्वा लेटेसीयर को लक्ष्य बनाते हुए, उनका चित्र अर्जेंटीना के नीले‑सफेद जर्सी में बनाकर मीम्स की बौछार की। वे दावा करते हैं कि रेफ़री के निर्णय ने अर्जेंटीना को अनावश्यक लाभ दिया, जिससे विश्व कप में मेस्सी का सफ़र जारी रहे। एक फेसबुक यूज़र ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, "लेटेसीयर को अर्जेंटीना के सर्वोच्च सम्मान, ऑर्डर ऑफ द लिबरेटर जनरल सैन मार्टिन, से सम्मानित किया जाना चाहिए।"

विरोधी आवाज़ें और व्यापक विवाद

पूर्व भारतीय फुटबॉलर सी.के. विनीत ने कहा कि यह बहस वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाती है: फिफा ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलरिन बालोगुन की लाल कार्ड को डोनाल्ड ट्रम्प की मांग पर उलटा। उनका मानना है कि ब्राज़ील और पुर्तगाल के समर्थक ही इस तरह की नाराजगी दिखा रहे हैं, न कि खेल की वास्तविकता।

स्थानीय दृष्टिकोण और भविष्य की संभावनाएँ

मलप्पुरम के ब्राज़ील समर्थक निशाद पी.के. ने कहा, "जब पूरी दुनिया ने लाइव देखा, तो कोई संदेह नहीं बचा। मिस्र के कप्तान मो सलाह और कोच हॉसम हसन दोनों ने रेफ़री के फैसलों की कड़ी निंदा की है।" वहीं, मालप्पुरम के व्हाट्सएप समूह के प्रशासक सलिह ने सवाल उठाया, "अगर अर्जेंटीना ने 80वें मिनट तक दो गोल पीछे रहा, तो ब्राज़ील की मोरक्को के खिलाफ बराबरी को भी सवालिया बनाया जाना चाहिए।"

यह विभाजन दर्शाता है कि फुटबॉल केवल खेल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अभिमान, राजनैतिक हस्तक्षेप और डिजिटल युग में मीम संस्कृति का भी प्रतिबिंब है। केरल के प्रशंसकों की इस बहस से यह स्पष्ट होता है कि विश्व कप जैसे मंच पर हर निर्णय को कई लेंसों से देखा जाता है।