पहले हाफ में पेनल्टी चूक के बाद भी केलीन म्बापे ने शानदार गोल कर फ्रांस को मोरोक्को के खिलाफ 2-0 से जीत दिलाई। इस जीत से फ्रांस लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में पहुँच गया।
क्वाटर के 2022 विश्व कप में मोरोक्को को 2-0 से हराने वाले फ्रांस ने 2026 का सेमीफ़ाइनल फिर से हासिल किया, इस बार केलीन म्बापे की व्यक्तिगत चमक ने टीम को आगे बढ़ाया। पहले हाफ में म्बापे की पेनल्टी चूक ने फ्रांस को तनाव में डाल दिया, लेकिन दोपहर के शुरुआती मिनटों में वह अपने ही गोल के साथ सब कुछ बदल दिया।
पहला हाफ: बची हुई आशा और मोरोक्को की दृढ़ रक्षा
मैच की शुरुआत में फ्रांस ने कई बार खतरा पैदा किया, परंतु मोरोक्को के गोलकीपर यासिन बुनू ने 28वें मिनट में एक शानदार बचाव किया, जब म्बापे को पेनल्टी पर मारने का अवसर मिला। बुनू ने सही समय पर रुककर डाइव न करके गेंद को रोक लिया, जिससे स्कोर 0-0 बना रहा। मोरोक्को की रक्षात्मक व्यवस्था, विशेषकर उनके मध्य क्षेत्र में दबाव, फ्रांस की आक्रमण को सीमित कर रहा था।
दूसरा हाफ: म्बापे की चमक और फ्रांस की दोहरी जीत
दोपहर के शुरुआती मिनटों में फ्रांस ने खेल पर नियंत्रण फिर से हासिल किया। 60वें मिनट में म्बापे ने बाएँ पेनल्टी एरिया से तेज़ी से चलते हुए एक सटीक शॉट मारा, जिससे गेंद दाहिनी कोने में जाके बैठ गई। यह गोल न केवल म्बापे के विश्व कप गोल को 20 तक पहुंचा, बल्कि उन्हें लियोनेल मेसी के पीछे केवल एक गोल की दूरी पर ले आया। छह मिनट बाद, ओस्मैन डेम्बेले ने 20 मीटर से दाहिनी पैर की मार से दूसरा गोल किया, जिससे फ्रांस का स्कोर 2-0 हो गया।
इतिहास और संभावित प्रभाव
यह जीत फ्रांस को लगातार तीसरे विश्व कप में सेमीफ़ाइनल में पहुंचा रही है, जो केवल दो देशों—ब्राज़ील और जर्मनी—के पास है। साथ ही, म्बापे का गोल और डेम्बेले की सहभागिता फ्रांस को गोल्डन बूट की दौड़ में मेसी के बराबर कर रही है, जहाँ दोनों खिलाड़ी अब आठ-आठ गोल पर बराबर हैं। मोरोक्को की टीम, जिसने 2022 में अफ्रीका के लिए पहली बार सेमीफ़ाइनल तक पहुंच बनाई थी, इस बार भी प्रतिस्पर्धी दिखी, परन्तु फ्रांस की आक्रमण शक्ति ने उन्हें पीछे धकेल दिया।
भविष्य की राह
सेमीफ़ाइनल में फ्रांस को अब एक और मजबूत प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ेगा, जबकि म्बापे को अपने गोल्डन बूट की दौड़ में आगे बढ़ने के लिए और अधिक गोल चाहिए। यह मैच न केवल फ्रांस की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि विश्व फुटबॉल में यूरोपीय टीमों की प्रभुता को भी पुनः स्थापित करता है।