विश्व कप के दौरान पुर्तगाली खिलाड़ी पेड्रो नेटो के कटे हुए जूतों ने एक पुरानी बहस को फिर से छेड़ दिया है। जानिए क्यों एथलीट अपने महंगे फुटवियर में यह अजीब बदलाव करते हैं।
हाल ही में आयोजित विश्व कप के दौरान, फुटबॉल प्रशंसकों और खेल विशेषज्ञों का ध्यान एक बेहद अजीब दृश्य की ओर गया। पुर्तगाल के फॉरवर्ड पेड्रो नेटो एक मैच में ऐसे जूते पहनकर उतरे थे जिनकी एड़ी का पिछला हिस्सा कटा हुआ था। पहली नज़र में यह किसी दुर्घटना जैसा लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह एक सोची-समझी रणनीति थी। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य उनके पैर के एक विशेष संवेदनशील हिस्से पर पड़ने वाले दबाव को कम करना था।
प्रदर्शन और आराम का संतुलन
हालांकि यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, लेकिन पेशेवर फुटबॉल की दुनिया में यह कोई नई बात नहीं है। कई खिलाड़ी अपने जूतों (cleats) को इसी तरह संशोधित करते हैं ताकि जूते और एड़ी के बीच होने वाले घर्षण (friction) को कम किया जा सके। फुटबॉल जैसे खेल में, जहाँ जूते मिलीमीटर की सटीकता के साथ फिट किए जाते हैं और खिलाड़ियों को अचानक दिशा बदलनी पड़ती है, एड़ी में मामूली सी बेचैनी भी उनके प्रदर्शन और गति को प्रभावित कर सकती है।
हैगलुंड सिंड्रोम: एक चिकित्सकीय कारण
एड़ी में होने वाली इस तकलीफ के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सामान्य छालों से लेकर टेंडन की सूजन तक शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक प्रमुख कारण 'हैगलुंड सिंड्रोम' (Haglund's syndrome) हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के अनुसार, यह स्थिति एड़ी की हड्डी के पिछले हिस्से में एक हड्डी के उभार (bony growth) के कारण होती है, जो अकिलीज़ टेंडन (Achilles tendon) के साथ रगड़ खाती है, जिससे दर्द और सूजन पैदा होती है।
नियमों के बीच का 'लूपहोल'
इस समस्या का प्राथमिक उपचार फुटवियर में बदलाव करना है। डॉक्टरों द्वारा कुशन वाले जूतों की सलाह दी जाती है, लेकिन फुटबॉल के सख्त नियमों के कारण खिलाड़ी अपने जूतों को पूरी तरह बदल नहीं सकते। यहीं पर वे 'लूपहोल' का उपयोग करते हैं—जैसे मोजों को काटना या जूतों की एड़ी को हटाना। पेड्रो नेटो ने Nike Mercurial Vapor 16 Elite मॉडल का उपयोग किया था, जिसे विशेष रूप से उनकी शारीरिक आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया गया था।
निष्कर्ष: कस्टमाइजेशन का महत्व
यह स्पष्ट है कि पेशेवर खेलों में 'वन साइज फिट्स ऑल' का सिद्धांत लागू नहीं होता। भले ही बाजार में उपलब्ध मॉडल एक जैसे हों, लेकिन शीर्ष स्तर के खिलाड़ी अपने शरीर की बनावट और चोटों के जोखिम को कम करने के लिए अपने गियर को कस्टमाइज़ करवाते हैं। यह सूक्ष्म बदलाव ही एक खिलाड़ी को मैदान पर अतिरिक्त बढ़त दिला सकते हैं।