यूरोपीय संसद के सदस्यों ने फुटबॉल के सर्वोच्च निकाय FIFA के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन के निलंबन को हटाने के फैसले ने राजनीतिक प्रभाव और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फुटबॉल की दुनिया में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। यूरोपीय संसद के 72 सदस्यों (MEPs) ने FIFA के अध्यक्ष जिआनी इन्फेंटिनो के खिलाफ गहन जांच की मांग की है। यह मांग तब उठी जब FIFA ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड के कारण लगे स्वचालित एक मैच के निलंबन को रहस्यमय तरीके से हटा दिया।
विवाद की जड़: ट्रंप का हस्तक्षेप?
इस पूरे मामले की जड़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कथित हस्तक्षेप बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से इन्फेंटिनो से संपर्क कर बालोगुन के प्रतिबंध को हटाने का आग्रह किया था। इसके महज चार दिन बाद, FIFA की अनुशासन समिति ने नियम बदलकर बालोगुन को खेलने की अनुमति दे दी। यह निर्णय खेल के बुनियादी नियमों और निष्पक्षता की परंपरा के खिलाफ माना जा रहा है।
यूरोपीय सांसदों का कड़ा रुख
'रिन्यू यूरोप' के सांसद बैरी एंड्रयूज ने इस घटना को न्याय का अपमान करार दिया है। उन्होंने एक पत्र के माध्यम से यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों के फुटबॉल संघों से अपील की है कि वे इन्फेंटिनो की जवाबदेही तय करने के लिए जांच का समर्थन करें। सांसदों का तर्क है कि यदि FIFA अपने सदस्यों से नैतिकता के मानकों का पालन करने की अपेक्षा करता है, तो उसे स्वयं भी राजनीतिक दबाव के सामने झुकना नहीं चाहिए।
निष्पक्षता पर गहराता संकट
यह केवल एक खिलाड़ी के निलंबन का मामला नहीं है, बल्कि यह FIFA की राजनीतिक तटस्थता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। हाल ही में, अन्य यूरोपीय राजनेताओं ने भी FIFA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जिसमें रूसी टीमों की भागीदारी और इन्फेंटिनो द्वारा राजनीतिक सिद्धांतों के उल्लंघन के आरोप शामिल हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह वैश्विक फुटबॉल के प्रशासन और उसकी विश्वसनीयता के लिए एक ऐतिहासिक संकट साबित हो सकता है।