ज्योति यर्राजी ने 383 दिन के बाद राष्ट्रीय इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में 12.99 सेकंड का समय करके अपनी चोट से उभारी ली। कोच जेम्स हिलियर की कड़ी पुनर्वास योजना, पोषण‑सहायता और मानसिक समर्थन ने इस ‘अटूट’ वापसी को संभव किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ज्योति ने 26‑वर्षीय उम्र में ACL चोट के बाद 383 दिन में राष्ट्रीय खिताब जीता।
- कोच जेम्स हिलियर ने पुनर्वास, पोषण और मानसिक समर्थन को मिलाकर एक मॉडल योजना तैयार की।
- यह कहानी भारतीय एथलेटिक्स में चोट‑पश्चात पुनरुत्थान के लिए एक नया मानक स्थापित करती है।
ज्योति यर्राजी, जो भारतीय एथलेटिक्स में 100 मीटर हर्डल की सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, ने जून 2025 में एक प्रशिक्षण सत्र के दौरान एसीएल (ACL) की गंभीर चोट झेली। इस चोट ने न केवल उसके व्यक्तिगत लक्ष्य को बाधित किया, बल्कि आगामी एशियन गेम्स के लिए भारत की संभावनाओं को भी जोखिम में डाल दिया।
पहले का शानदार सीजन
2024 के राष्ट्रीय खेलों में ज्योति ने 100 मीटर हर्डल और 200 मीटर दोनों में स्वर्ण पदक जीता, उसके बाद फेडरेशन कप और एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में भी विजयी रही। ताइवान ओपन में जीत ने उसके विश्व स्तर के प्रतिस्पर्धा की क्षमता को दृढ़ किया, जिससे वह एशियन गेम्स की आशा बन गई।
आघात और पुनरुद्धार की यात्रा
जाने के बाद, ज्योति को सर्जरी के बाद 383 दिन का लंबा अंतराल मिला, जिसमें वह राष्ट्रीय इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में 12.99 सेकंड के समय से फिर से शीर्ष पर पहुंची। इस अवधि में कोच जेम्स हिलियर ने एक विस्तृत पुनर्वास प्रोटोकॉल लागू किया: शुरुआती दो हफ्ते में केवल कंधे‑ऊपर की शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम, फिर धीरे‑धीरे घुटने के स्थिरता अभ्यास। साथ ही, हिलियर ने रोज़ाना ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और चॉकलेट जैसी पोषक‑संतुलित चीज़ें भेजी, जिससे मानसिक उन्नति बनी रही।
मानसिक दृढ़ता और आत्म‑कोचिंग
ज्योति ने अपने कोच को "कोच, शट अप" कहकर साहसिक शब्दों में समर्थन दिया, जिससे वह खुद को कोचिंग करने लगी। यह उलटफेर दोनों के लिए सीख का स्रोत बना—हिलियर ने कहा कि वह अपनी असुरक्षा को स्वीकार कर चुका था, जबकि ज्योति ने दर्द को स्वीकारते हुए आगे बढ़ना सीखा।
भविष्य की दिशा
अब ज्योति न केवल एशियन गेम्स के लिए क्वालिफ़ाई कर चुकी है, बल्कि वह भारतीय महिला एथलेटिक्स में पुनरावृत्ति की नई मिसाल कायम कर रही है। उसके प्रशिक्षण में नया जोड़—स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच वेन लोम्बार्ड—भविष्य में अधिक वैज्ञानिक आधार पर तैयारी को सुनिश्चित करेगा। इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि चोट के बाद पुनरुद्धार में पोषण, मानसिक समर्थन और क्रमिक प्रतिस्पर्धा का संतुलन ही सफलता की कुंजी है।