पूर्व बैटिंग कोच संजय बांगड़ ने बताया कि विराट कोहली ने इंग्लैंड की स्विंग और नमी को मात देने के लिए मुंबई में अतिरिक्त पानी डालकर पिच तैयार की। इस कठोर तैयारी ने पिछले दौर में भारतीय बल्लेबाज़ों को इंग्लैंड में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अब टीम को T20 में निराशा के बाद ODI श्रृंखला में पुनरुत्थान का लक्ष्य है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कोहली ने इंग्लैंड की पिचों की नमी को अनुकरण करने के लिये मुंबई में अतिरिक्त पानी डाला।
- सत्र सुबह 6 बजे शुरू करके ड्यू और भारी हवा का उपयोग किया गया।
- यह तैयारी भारतीय बल्लेबाज़ों की इंग्लैंड में सफलता में मुख्य कारक रही।
नई दिल्ली: भारत की टीम वर्तमान में यूके में अपने सफेद गेंद वाले दौरे के शुरुआती चरण में निराशाजनक परिणामों का सामना कर रही है। आयरलैंड के खिलाफ 0‑2 और इंग्लैंड के खिलाफ 0‑3 T20I शृंखला के बाद, अब ध्यान तीन‑मैच ODI शृंखला की ओर स्थानांतरित हो गया है, जहाँ विराट कोहली और रोहित शर्मा को शुबमन गिल की कप्तानी में बैटिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
संजय बांगड़ का खुलासा
डोरदर्शन के ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो’ में बांगड़ ने बताया कि 2014 की असफल इंग्लैंड यात्रा के बाद कोहली ने अपनी तैयारी में एक मौलिक बदलाव किया। उन्होंने कहा, “जब आप इंग्लैंड जाते हैं, तो खेल दो चीज़ों पर निर्भर करता है – स्विंग को कैसे संभालें और गेंद को देर तक कैसे खेलें।” इस सिद्धांत को लागू करने के लिये कोहली ने 2017‑18 में मुंबई के मैदानों में सुबह 6‑6:30 बजे तक अभ्यास शुरू किया, ताकि शुरुआती ओस और भारी हवा का प्रभाव महसूस किया जा सके।
पिच पर अतिरिक्त पानी
बांगड़ ने बताया कि जब सूरज निकलता और पिच की नमी घटती, तो कोचिंग स्टाफ ने सीधे पिच पर अतिरिक्त पानी डाल दिया। “यदि नमी कम हो रही थी, तो हम पानी डालते थे ताकि गेंद फिर से ‘स्नेकिंग’ कर सके,” उन्होंने कहा। यह अनूठा अभ्यास कोहली को स्विंग के खिलाफ तकनीकी रूप से परिपूर्ण बनाता गया।
प्रभाव और परिणाम
बांगड़ के अनुसार, यह कठोर सिमुलेशन ने भारत के मुख्य चार‑पाँच बल्लेबाज़ों को इंग्लैंड की परिस्थितियों में आत्मविश्वास दिलाया। “इन सिमुलेशन से हमारे कई कोर बैट्समन ने अपनी तकनीक को निखारा, और वही कारण था कि हमने इंग्लैंड में कई जीत हासिल कीं,” उन्होंने कहा। अब, जबकि टीम T20 में कठिनाइयों का सामना कर रही है, कोहली और रोहित के पास ODI में इस तैयारी को फिर से साबित करने का अवसर है।
आगे की राह
बांगड़ ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भी भारतीय टीमें इंग्लैंड जैसी नमी‑भरी पिचों के लिये इसी तरह की ‘वॉटर‑ड्रिप’ रणनीति अपनाएगी। यह न केवल तकनीकी अनुकूलन को दर्शाता है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की दीर्घकालिक विज़न को भी उजागर करता है – जहाँ हर विदेशी टूर को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाता है।