31 वर्षीय सर्वेश कुशारे ने मोनाको में आयोजित डायमंड लीग में 2.26 मीटर की ऊँचाई पर तीसरा स्थान हासिल कर भारत का पहला डेब्यू पेडियम हासिल किया। यह उपलब्धि उनके शानदार 2026 सीज़न को और रोशन करती है, जो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में मददगार होगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सर्वेश कुशारे ने डायमंड लीग डेब्यू में 2.26 मीटर पर तीसरा स्थान हासिल किया
  • पहले भारतीय जो डेब्यू में टॉप‑तीन में आए और केवल चौथे भारतीय जिन्होंने इस स्तर तक पहुंची
  • यह सफलता 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए उनकी तैयारी को और मजबूत बनाती है

मोनाको के स्टेड लुईस द्वितीय में 31 वर्षीय भारतीय हाई जंपर सर्वेश कुशारे ने अपनी पहली डायमंड लीग प्रतियोगिता में 2.26 मीटर की छलांग लगाकर तेरहवें क्रम में तीसरा स्थान सुरक्षित किया। यह उपलब्धि न केवल भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नई दास्तान जोड़ती है, बल्कि कुशारे को विश्व स्तर पर एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करती है।

डायमंड लीग डेब्यू में अद्वितीय सफलता

कुशारे ने प्रत्येक प्रयास में पहली बार में ही 2.12, 2.16, 2.20, 2.23 और 2.26 मीटर की सफलतापूर्वक छलांगें पूरी कीं, जबकि 2.28 मीटर पर तीन बार असफल रहने के बाद भी वह तीसरे स्थान पर रहे। उनका यह प्रदर्शन उन्हें भारत के पहले ऐसे एथलीट बनाता है जो डेब्यू में टॉप‑तीन में आया है, और साथ ही केवल चौथे भारतीय हैं जिन्होंने डायमंड लीग में पदक जीता है—विकास गोडा, नीरज चोपड़ा और मुराली श्रीशंकर के बाद।

प्रतिस्पर्धी माहौल और अंतरराष्ट्रीय स्तर

इवेंट में यूक्रेन के ओलेह डोरॉश्चुक ने 2.32 मीटर पर जीत हासिल की, जबकि ब्रिटेन के जैक किमानी ने 2.30 मीटर से दूसरा स्थान प्राप्त किया। कुशारे ने टोकियो ओलंपिक के दोहरा स्वर्ण पदक विजेता गैअनमार्को टाम्बेरी (इटली) और मुताज़ बर्शिम (क़तर) जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए सातवें और आठवें क्रम में समाप्त हुए। यह परिणाम दर्शाता है कि भारतीय हाई जंपर अब विश्वश्रेणी के प्रतिस्पर्धियों के बीच भी अपनी जगह बना रहा है।

पिछला रिकॉर्ड और भविष्य की दिशा

पिछले महीने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कुशारे ने 2.31 मीटर की नई राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित की, जो तेजस्विन शंकर की आठ साल पुरानी सीमा को तोड़ता है। इसके अलावा, वह पिछले साल टोक्यो विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय हाई जंपर के रूप में पहली बार फाइनल में पहुंचने वाले थे। अब वह भारत के 32 सदस्यीय एथलेटिक्स स्क्वाड में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयनित हो चुके हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और भी बढ़ गया है।

निष्कर्ष

कुशारे की इस पेडियम जीत ने न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी लिखी है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नई दिशा भी निर्धारित की है। उनके निरंतर सुधार और अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारत हाई जंप में विश्व स्तर पर और भी अधिक पहचान बना सकता है।