फीफा विश्व कप 2026 में मिस्र और अर्जेंटीना के बीच हुए मुकाबले में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) तकनीक एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है, जिसके बाद फीफा को नियमों में बड़ा बदलाव करना पड़ा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मिस्र और अर्जेंटीना के बीच विश्व कप मैच में VAR के एक विवादास्पद फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया, जिससे मिस्र को 2-3 से हार का सामना करना पड़ा।
- फीफा के रेफरी प्रमुख पियरलुइगी कोलीना ने स्पष्ट किया कि गोल से पहले हुए फाउल की समीक्षा के लिए समय या दूरी की कोई निश्चित सीमा नहीं है।
- विवाद बढ़ता देख फीफा ने टूर्नामेंट के बाकी बचे मैचों (क्वार्टर फाइनल से फाइनल) के लिए प्रति मैच दो इन-हाउस VAR अधिकारी नियुक्त करने का बड़ा फैसला लिया है।
7 जुलाई 2026 को अटलांटा में खेले गए फीफा विश्व कप राउंड-ऑफ-16 के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) तकनीक एक बार फिर तीखी आलोचनाओं के घेरे में आ गई। इस मुकाबले में मिस्र और अर्जेंटीना की टीमें आमने-सामने थीं। मिस्र की टीम, जो एक समय दो गोल की बढ़त पर थी, अंततः यह मैच 2-3 से हार गई। मैच के दौरान मिस्र का एक बेहतरीन गोल VAR के हस्तक्षेप के बाद रद्द कर दिया गया, जिसने इस पूरी बहस को जन्म दिया कि क्या तकनीक फुटबॉल की सहजता और निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा रही है।
क्या है VAR और कैसे काम करता है यह सिस्टम?
VAR यानी वीडियो असिस्टेंट रेफरी, फुटबॉल में ऑन-फील्ड रेफरी की मदद के लिए बनाई गई एक तकनीकी प्रणाली है। इसकी शुरुआत 2010 के दशक में प्रस्तावित की गई थी और 2016 में इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) ने इसे मंजूरी दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य मैच के दौरान होने वाली 'स्पष्ट और गंभीर गलतियों' (clear and obvious errors) को रोकना है। इसके तहत स्टेडियम के विभिन्न कोणों पर हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाए जाते हैं और एक सेंट्रल हब में बैठा रेफरी ऑन-फील्ड रेफरी को संदिग्ध फैसलों पर पुनर्विचार करने की सलाह देता है। हालांकि, अंतिम निर्णय हमेशा मैदान पर मौजूद रेफरी का ही होता है।
मिस्र बनाम अर्जेंटीना मैच में क्या हुआ?
मैच के दूसरे हाफ में मिस्र के खिलाड़ी मुस्तफा जीको ने एक शानदार मूव पर गोल दागकर अपनी टीम को जश्न मनाने का मौका दिया। लेकिन यह खुशी कुछ ही मिनटों में निराशा में बदल गई। डलास में बैठे VAR रेफरी जेरोम ब्रिसार्ड ने ऑन-फील्ड रेफरी फ्रेंकोइस लेटेक्सियर को सलाह दी कि वे गोल से ठीक पहले मिस्र के मरवान अत्तिया द्वारा अर्जेंटीना के लिसैंड्रो मार्टिनेज पर किए गए एक संभावित फाउल की जांच करें। ऑन-फील्ड समीक्षा के बाद, रेफरी ने गोल को अमान्य घोषित कर दिया। मिस्र की टीम का तर्क था कि यह कथित फाउल गोल के प्ले-बिल्डअप से काफी दूर और बहुत पहले हुआ था, इसलिए इसे आधार बनाकर गोल रद्द करना अनुचित था।
फीफा का स्पष्टीकरण और नया नियम
इस विवाद पर फीफा के रेफरी प्रमुख पियरलुइगी कोलीना ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, 'यदि गोल के बिल्ड-अप में किसी फाउल की पहचान की जाती है और माना जाता है कि उसका गोल पर प्रभाव पड़ा था, तो VAR ऑन-फील्ड समीक्षा की सिफारिश करेगा। इसके लिए दूरी या समय की कोई तय सीमा नहीं है।' इस फैसले से नाराज मिस्र के कोच होसाम हसन ने रेफरी पर पक्षपात का आरोप लगाया और मिस्र फुटबॉल महासंघ ने फीफा में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। इस भारी दबाव के बाद, फीफा ने एक बड़ा कदम उठाते हुए टूर्नामेंट के बाकी बचे मैचों (क्वार्टर फाइनल से फाइनल) के लिए प्रत्येक मैच में दो इन-हाउस VAR अधिकारियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
VAR को लेकर बढ़ती चिंताएं
यह पहला मौका नहीं है जब VAR विवादों में है। आलोचकों का मानना है कि इस तकनीक के आने से फुटबॉल का खेल 'सॉफ्ट' होता जा रहा है, जहां रेफरी उन छोटे-छोटे फाउल्स को भी पकड़ रहे हैं जिन्हें सामान्यतः नजरअंदाज कर दिया जाता है। जर्मनी के डिफेंडर जोनाथन ताह का पैराग्वे के खिलाफ रद्द किया गया गोल भी इसका एक बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा, मैदान पर रेफरी और VAR रूम के बीच होने वाली बातचीत को लेकर पारदर्शिता की कमी भी प्रशंसकों और खिलाड़ियों को असमंजस में रखती है।