पूर्व क्रिकेटर संजय मंजरेकर ने भारत की इंग्लैंड के खिलाफ 0‑4 ट20 श्रृंखला हार के बाद कोच, कप्तान या खिलाड़ियों को निकालना आसान तो है, पर समाधान नहीं है, कहा। उन्होंने आईपीएल की आसान पिचों को मुख्य दोषी बताया और चयन प्रक्रिया में गहरी सुधार की मांग की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 0‑4 ट20 हार झेली, जो इतिहास में बड़ी गिरावट है।
  • मंजरेकर का तर्क है कि समस्या आईपीएल की आसान बैटिंग परिस्थितियों में है, न कि कोच या कप्तान में।
  • वह चयन प्रक्रिया और पिच तैयारियों में गहरा परिवर्तन माँगते हैं।

भारत ने हाल ही में 2024 के टी20 विश्व कप में जीत हासिल कर अपने श्रेष्ठतम रूप को स्थापित किया था, परन्तु विदेश में दो लगातार श्रृंखलाओं में निरंतर हार ने टीम को बहुत ही निचले स्तर पर ले आया। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ क्रमशः 0‑2 और 0‑4 की हार ने भारतीय टीम को न केवल विश्व रैंकिंग में पीछे धकेला, बल्कि आत्मविश्वास को भी धूमिल कर दिया।

पृष्ठभूमि

ट्रॉफी जीत के बाद शुर्वकुमार यादव ने टीम की कप्तानी छोड़ दी और श्रेयस अय्यर को नई कप्तानी मिली। अय्यर की कप्तानी में सात में से छह ट20I में भारत हार गया, जबकि एक मैच बारिश के कारण रद्द हो गया। यह आँकड़ा दर्शाता है कि नई नेतृत्व शैली और टीम चयन में गहरी समस्याएँ निहित हैं।

मंजरेकर की आलोचना

इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में मंजरेकर ने कहा, “यदि भारत को आसानी से समाधान चाहिए तो कोच गौतम गम्भीर, कप्तान या कुछ खिलाड़ियों को निकालना आसान है, पर इससे समस्या हल नहीं होगी।” उनका मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों को विदेश में कठिन पिचों के लिए तैयार नहीं किया गया, क्योंकि अधिकांश चयन आईपीएल में चमकते हुए खिलाड़ियों पर आधारित था।

आईपीएल को “सबसे आसान बैटिंग परिस्थितियों” के रूप में वर्णित करते हुए उन्होंने कहा, “आईपीएल की पिचें मार्बल शीट जैसी होती हैं, जिससे बल्लेबाजों की वास्तविक क्षमता को आँका नहीं जा सकता।” इस कारण आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ी विदेश में असफल होते हैं।

बीसीसीआई के लिए प्रभाव

मंजरेकर ने सुझाव दिया कि केवल कोच या कप्तान को निकालना पर्याप्त नहीं है; चयन समिति को उन लोगों को भी जिम्मेदार ठहराना चाहिए जो आईपीएल में “बेटिंग‑फ्रेंडली” पिचें तैयार करते हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों को गहराई से जाँचें और निकालें जो बीसीसीआई को यह सलाह देते हैं कि पिचें अधिक चौकों और छक्कों के लिये अनुकूल हों।” यह बदलाव न केवल घरेलू क्रिकेट की गुणवत्ता को बढ़ाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय टीम की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी सुदृढ़ करेगा।

आगे का रास्ता

यदि बीसीसीआई चयन प्रक्रिया में विविधता लाए और खिलाड़ियों को विविध पिचों पर तैयार करे, तो भविष्य में ऐसी ही श्रृंखलात्मक हारें कम हो सकती हैं। शुबहम गिल जैसे खिलाड़ी, जो विभिन्न परिस्थितियों में सफल हो सकते हैं, को प्राथमिकता देना चाहिए। अंततः, प्रणालीगत सुधार और पिच के वास्तविक परीक्षण ही भारतीय ट20 क्रिकेट को पुनः विश्व शीर्ष पर लौटाएंगे।