भारतीय खेल मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) को एक स्वतंत्र जांच पैनल स्थापित करने का निर्देश दिया है, ताकि पूर्व महिला हॉकी कप्तान असुंता लाकड़ा के यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने इस कदम का समर्थन किया, क्योंकि वे आंतरिक जांच को पक्षपातपूर्ण मानते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सरकार ने IOA को स्वतंत्र पैनल बनाने का आदेश दिया
  • असुंता लाकड़ा ने हॉकी इंडिया में यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोप लगाए
  • हॉकी इंडिया के पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की ने आंतरिक जांच को पक्षपातपूर्ण कहा

भारत के खेल मंत्रालय ने गुरुवार को भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) को एक स्वतंत्र जांच पैनल गठित करने का निर्देश जारी किया, ताकि पूर्व महिला हॉकी कप्तान असुंता लाकड़ा के यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोपों की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जा सके। यह कदम तब आया जब हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा कि संघ के आंतरिक शिकायत समिति (ICC) द्वारा जांच करने से निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

पृष्ठभूमि व आरोप

असुंता लाकड़ा, जो वर्तमान में हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड की सदस्य और राष्ट्रीय चयनकर्ता भी हैं, ने खेल मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया में महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न, धमकी और पीड़ितीकरण की एक प्रणालीगत समस्या बनी हुई है, जिसमें संघ के जनरल सेक्रेटरी भोलानाथ सिंह का भी उल्लेख किया गया है। लाकड़ा के ये आरोप न केवल व्यक्तिगत बल्कि संस्थागत स्तर पर भी गहरा असर डालते हैं।

दिलीप तिर्की का हस्तक्षेप

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष तिर्की ने मंत्रालय को एक ई‑मेल में बताया कि आंतरिक शिकायत समिति की जांच पक्षपाती हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्ष—शिकायतकर्ता और प्रतिवादी—हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि “स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच” सुनिश्चित करने के लिए एक ऐसी समिति की जरूरत है जो हॉकी इंडिया से पूरी तरह अलग हो। तिर्की ने सभी बोर्ड सदस्यों से अनुरोध किया कि वे जांच को प्रभावित करने वाली कोई भी कार्रवाई या संवाद न करें।

सरकार की प्रतिक्रिया

स्पोर्ट्स मंत्रालय ने तिर्की के अनुरोध को स्वीकार कर IOA को एक स्वतंत्र पैनल बनाने का आदेश दिया। यह पैनल उन व्यक्तियों से बना होगा जो हॉकी इंडिया से किसी भी प्रकार से जुड़े नहीं हैं, जिससे जांच में विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनी रहेगी। मंत्रालय ने कहा कि वह “खेल में सभी एथलीटों की सुरक्षा, सम्मान और संरक्षण” को प्राथमिकता देगा और यह कदम भारतीय खेल संस्थानों में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि इस पैनल की जांच में लाकड़ा के आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह भारतीय हॉकी में एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है। महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में सख्त कार्रवाई से अन्य खेल संघों में भी समान उपाय अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है। साथ ही, यह कदम अंतर्राष्ट्रीय खेल मंचों पर भारत की छवि को भी सकारात्मक रूप में प्रस्तुत करेगा।