अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने एक दिलचस्प कारण बताया है कि वे फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में मेसी की टीम का समर्थन करने क्यों नहीं जाएंगे। अंधविश्वास और फुटबॉल संस्कृति का यह संगम पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- राष्ट्रपति जेवियर माइली फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल (अर्जेंटीना बनाम स्पेन) में शामिल नहीं होंगे।
- मैच में शामिल न होने का कारण अर्जेंटीना की गहरी फुटबॉल परंपरा 'कबालास' (Cábalas) यानी अंधविश्वास है।
- माइली ने बताया कि वे अपने राष्ट्रपति आवास 'ओलिवोस' से ही मैच देखेंगे ताकि टीम पर कोई बुरा असर न पड़े।
- अर्जेंटीना के पूर्व राष्ट्रपति कार्लोस मेनम के समय से ही राष्ट्राध्यक्षों का मैच में जाना 'अपशकुन' माना जाता है।
फुटबॉल केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, जुनून और कभी-कभी गहरे अंधविश्वासों का मिश्रण है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में जब लियोनेल मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना की टीम स्पेन से टकराएगी, तो दुनिया की नजरें मैदान पर होंगी। लेकिन एक बड़ी कमी खलने वाली है—अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली का स्टेडियम में मौजूद न होना।
'कबालास': अर्जेंटीना की फुटबॉल संस्कृति का अटूट हिस्सा
अर्जेंटीना में अंधविश्वास, जिसे स्थानीय रूप से 'कबालास' (Cábalas) कहा जाता है, फुटबॉल संस्कृति की आत्मा में रचा-बसा है। प्रशंसक और खिलाड़ी जीत सुनिश्चित करने के लिए अजीबोगरीब रस्में निभाते हैं—जैसे एक ही तरह के कपड़े पहनना, एक ही जगह बैठना, या जर्सी न धोना। राष्ट्रपति माइली ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस परंपरा को नहीं तोड़ेंगे। उन्होंने एक स्थानीय रेडियो स्टेशन को बताया कि वे मेसी की टीम को स्टेडियम में बैठकर देखने के बजाय अपने राष्ट्रपति निवास 'ओलिवोस' से ही समर्थन देंगे।
एक जैकेट और जीत का रहस्य
माइली ने अपने अंधविश्वास का एक दिलचस्प उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान, उन्होंने एक तेल कंपनी की ब्रांडेड जैकेट पहनी थी। जब उन्होंने गर्मी के कारण वह जैकेट उतारी, तो अर्जेंटीना को गोल खाना पड़ा। इसके तुरंत बाद उन्होंने जैकेट वापस पहन ली और टीम ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसी अनुभव ने उन्हें फाइनल में स्टेडियम जाने से रोकने का निर्णय लेने पर मजबूर किया है।
इतिहास का सबक: 'मुफा' बनने का डर
अर्जेंटीना के राष्ट्राध्यक्षों के लिए मैच में जाना हमेशा से जोखिम भरा रहा है। इस डर की जड़ें 1990 के विश्व कप में हैं, जब तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनम ने टीम से मुलाकात की थी, जिसके बाद अर्जेंटीना को कैमरून के खिलाफ शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। तब से, उन्हें 'मुफा' (Mufa) यानी 'अपशकुन लाने वाला' माना जाने लगा। यही कारण है कि कोई भी अर्जेंटीना का राष्ट्रपति इतने बड़े मुकाबले में टीम के साथ बैठने का साहस नहीं करता।
अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या मेसी की टीम इस ऐतिहासिक अंधविश्वास को पीछे छोड़ते हुए स्पेन को हराकर अपना खिताब बरकरार रख पाएगी या नहीं।