एनसीएए डिवीजन I बोर्ड ने नई आयु‑आधारित पात्रता मॉडल को बदले बिना समर्थन दिया, जबकि कई एथलीटों ने अतिरिक्त सालों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी है। डिएगो पाविया की जीत के बाद भी यह नीति अभी भी लागू है।
मुख्य बिंदु
- डिवीजन I बोर्ड ने आयु‑आधारित पात्रता नियम को स्थिर रखा।
- डिएगो पाविया के केस के बाद भी नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
- नया नियम पाँच वर्षों में पाँच सीज़न खेलने की अनुमति देता है, कुछ अपवादों को छोड़कर।
बोर्ड का निर्णय और वर्तमान स्थिति
एनसीएए डिवीजन I बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने गुरुवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि वह आयु‑आधारित पात्रता नियम के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा, चाहे एथलीटों की कानूनी चुनौतियाँ कितनी भी बढ़ें। यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि बोर्ड इस नीति को संशोधित करने का कोई इरादा नहीं रखता।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2024 में डिएगो पाविया ने ओहायो राज्य कोर्ट में जीत हासिल करने के बाद एनसीएए ने गैर‑एनसीएए स्कूलों से आए एथलीटों को एक अतिरिक्त वर्ष की पात्रता दी थी। उस जीत के बाद कई संस्थानों ने समान राहत की माँग की, जिससे नई आयु‑आधारित मॉडल पर बहस शुरू हुई।
नियम की मुख्य बातें
नए नियम के तहत, छात्र‑एथलीट को पाँच साल की अवधि में पाँच सीज़न खेलने की अनुमति है। यह अवधि तब शुरू होती है जब वे पूर्ण‑कालिक छात्र बनते हैं या 19वें जन्मदिन के बाद शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत, जो भी पहले हो। धार्मिक मिशन, गर्भावस्था और सक्रिय सैन्य सेवा को अपवाद माना गया है, जबकि चोट के कारण विस्तार अब नहीं दिया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the board’s steadfast stance could reshape recruiting strategies across the United States, forcing colleges to reassess scholarship allocations and roster planning for the next decade.
"आयु‑आधारित नियम कॉलेज खेलों में प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन लाने का प्रयास है, लेकिन यह छोटे‑छात्रों के भविष्य को सीमित कर सकता है," कहते हैं प्रोफेसर अजय सिंह, खेल कानून विशेषज्ञ।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या मौजूदा चार‑सीज़न वाले एथलीट नए नियम से लाभान्वित होंगे?
A: नहीं, वे अभी भी चार सीज़न में समाप्त हो जाएंगे और अतिरिक्त वर्ष नहीं मिलेगा।
Q2: किन परिस्थितियों में अतिरिक्त वर्ष की अनुमति मिल सकती है?
A: केवल धार्मिक मिशन, गर्भावस्था, सक्रिय सैन्य सेवा और कुछ विशिष्ट चिकित्सा मामलों में ही अपवाद दिया जाएगा।