सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने से लेकर कॉमनवेल्थ पोडियम तक, बिहार के झंडू कुमार ने गरीबी और पोलियो को मात देकर भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता है।

मुख्य बातें

  • झंडू कुमार ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत का पहला पदक जीता।
  • बिहार के नालंदा जिले से ताल्लुक रखने वाले झंडू ने पोलियो और अत्यधिक गरीबी का सामना किया।
  • उन्होंने अपने प्रशिक्षण के लिए अपना एकमात्र आजीविका का साधन, ई-रिक्शा तक बेच दिया।
  • उनका अगला लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक है।

ग्लासगो के पोडियम पर खड़े होकर जब झंडू कुमार ने अपनी कांस्य पदक की चमक देखी, तो वह केवल एक खेल प्रतियोगिता का परिणाम नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, त्याग और अटूट संकल्प की जीत थी। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में, झंडू ने 190 किलोग्राम का सफल लिफ्ट करते हुए 130.9 अंकों के साथ भारत का पहला पदक सुनिश्चित किया।

एक संघर्षपूर्ण अतीत

बिहार के नालंदा जिले के हरनौत बाजार से आने वाले झंडू का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। बचपन में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। एक समय था जब उन्हें अपने परिवार का पेट पालने के लिए सब्जी बेचनी पड़ती थी और फिर ई-रिक्शा चलाना पड़ता था। उनकी दैनिक कमाई मात्र 400-500 रुपये थी, जो एक एथलीट के पोषण और प्रशिक्षण के खर्चों के सामने बहुत कम थी।

बड़ा जोखिम और बड़ी सफलता

झंडू के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने 2023 में दिल्ली में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने और अपने आहार का खर्च उठाने के लिए अपना ई-रिक्शा बेच दिया। यह एक बड़ा जुआ था, क्योंकि उनके पास कोई वित्तीय सुरक्षा नहीं थी। हालांकि शुरुआत में परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन इसी मोड़ ने उन्हें 2004 एथेंस पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता राजेंद्र सिंह राहेलू से मिलवाया, जिन्होंने उनके मार्गदर्शन में उनके करियर को नई दिशा दी।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, झंडू कुमार की सफलता भारत में जमीनी स्तर के एथलीटों के लिए एक मिसाल है। यह दर्शाता है कि कैसे सही मेंटरशिप और अटूट इच्छाशक्ति के साथ, बुनियादी संसाधनों की कमी को भी पार किया जा सकता है।

"झंडू की जीत केवल एक पदक नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए एक संदेश है जो अभावों में सपने देखते हैं।"

साधना और प्रशिक्षण के माध्यम से, झंडू ने न केवल राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि बीजिंग में विश्व कप और बैंकॉक में एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में भी पदक जीतकर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया। अब उनकी नजरें 2028 के लॉस एंजिल्स पैरालंपिक पर टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झंडू कुमार ने कौन सा पदक जीता है?

झंडू कुमार ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीता है।

झंडू कुमार कहाँ के रहने वाले हैं?

वह बिहार के नालंदा जिले के हरनौत बाजार के रहने वाले हैं।

क्या आप जानते हैं?: झंडू ने अपने प्रशिक्षण के खर्चों के लिए अपना एकमात्र आय का साधन, ई-रिक्शा तक बेच दिया था।