आगामी एफआईएच हॉकी विश्व कप के लिए भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने अपनी पारंपरिक नीली जर्सी को छोड़कर केसरिया रंग की जर्सी अपनाने का फैसला किया है। इस बदलाव पर पूर्व कप्तान वीरेन रस्किनहा ने सवाल उठाए हैं, जबकि हॉकी इंडिया ने इसे तकनीकी आवश्यकता बताया है।

मुख्य बातें

  • भारतीय हॉकी टीमें अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले विश्व कप में केसरिया जर्सी पहनेंगी।
  • हॉकी इंडिया का कहना है कि नीली जर्सी मैदान के नीले रंग में मिल जाती थी, जिससे दृश्यता में समस्या होती थी।
  • पूर्व कप्तान वीरेन रस्किनहा ने इस बदलाव को टीम की पहचान और विरासत के खिलाफ बताते हुए 'शर्मनाक' कहा है।
  • नई जर्सी में 'मंडला' पैटर्न और देवनागरी लिपि का उपयोग किया गया है।

भारतीय हॉकी के इतिहास में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आगामी FIH हॉकी विश्व कप 2026 के लिए, भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमें अपनी प्रतिष्ठित नीली किट को त्यागकर केसरिया (Saffron) रंग की जर्सी में मैदान पर उतरेंगी। यह निर्णय हॉकी इंडिया द्वारा लिया गया है, जिसे लेकर खेल जगत में बहस छिड़ गई है।

क्यों हुआ यह बदलाव?

हॉकी इंडिया ने इस निर्णय का बचाव करते हुए इसे पूरी तरह से तकनीकी आधार पर लिया है। संस्था के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी के मैदान अब नीले सिंथेटिक टर्फ से बने होते हैं। पारंपरिक नीली जर्सी के कारण खिलाड़ियों को मैदान के रंग के साथ घुलने-मिलने (blend) की समस्या हो रही थी, जिससे खेल के दौरान खिलाड़ियों की दृश्यता और ऑन-फील्ड स्पष्टता प्रभावित हो रही थी।

संस्था ने स्पष्ट किया कि कोचों और खिलाड़ियों के परामर्श के बाद पीले या केसरिया जैसे रंगों पर विचार किया गया, जिसमें अंततः केसरिया को चुना गया। केसरिया रंग न केवल साहस और बलिदान का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय ध्वज का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

"नीली जर्सी भारतीय हॉकी की पहचान रही है। इस बदलाव से टीम की विरासत और प्रशंसकों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।"

विवाद और आलोचना

इस फैसले का कड़ा विरोध पूर्व राष्ट्रीय टीम के कप्तान और ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के सीईओ वीरेन रस्किनहा ने किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बदलाव को 'शर्मनाक' करार दिया। रस्किनहा का तर्क है कि नीली जर्सी टीम की पहचान और गौरव का प्रतीक रही है, और इस तरह का अचानक बदलाव टीम की विरासत के साथ न्याय नहीं करता।

डिजाइन और सांस्कृतिक महत्व

नई जर्सी केवल रंग बदलने तक सीमित नहीं है; इसमें भारतीय संस्कृति की झलक भी दी गई है। जर्सी पर 'मंडला' प्रेरित पैटर्न हैं और 'INDIA' शब्द को देवनागरी लिपि में लिखा गया है। इसके अलावा, जर्सी पर गहरे नेवी ब्लू रंग के निशान अशोक चक्र से प्रेरित हैं, जो प्रगति और शांति का प्रतीक है।

क्या आप जानते हैं?: हॉकी इंडिया ने बताया कि जर्सी में बदलाव पहले भी हो चुका है, जैसे 2014 में पीली और 2018 में आसमानी नीली जर्सी का उपयोग किया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारतीय टीम केसरिया जर्सी क्यों पहन रही है?
मुख्य कारण नीले मैदान पर नीली जर्सी की दृश्यता (visibility) की समस्या को दूर करना और राष्ट्रीय गौरव को प्रदर्शित करना है।

2. विश्व कप कब आयोजित किया जाएगा?
FIH हॉकी विश्व कप 15 से 30 अगस्त के बीच बेल्जियम और नीदरलैंड में आयोजित किया जाएगा।