राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को केसरिया रंग में बदलने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे खेल की पहचान के साथ खिलवाड़ बताया है।

मुख्य बातें

  • भारतीय हॉकी टीम अब नीली के बजाय केसरिया जर्सी में खेलेगी।
  • कपिल सिब्बल ने इसे 'एक और गिरावट' बताते हुए राजनीतिक तंज कसा है।
  • हॉकी इंडिया ने इसे तकनीकी आवश्यकता और दृश्यता बढ़ाने का उपाय बताया है।
  • पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने भी इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग को पारंपरिक नीले से बदलकर केसरिया करने के फैसले की तीखी आलोचना की है। सिब्बल ने इसे 'एक और गिरावट' करार दिया है जो पहले कभी नहीं देखी गई।

अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले FIH विश्व कप में भारतीय पुरुष और महिला टीमें नीली किट के बजाय केसरिया जर्सी में नजर आएंगी। इस बदलाव पर जहां पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए हैं, वहीं हॉकी इंडिया ने इसे एक तकनीकी आवश्यकता बताया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, खेल की जर्सी केवल एक पोशाक नहीं बल्कि टीम की पहचान और दशकों पुरानी विरासत होती है। रंग परिवर्तन न केवल खेल की दृश्यता को प्रभावित करता है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतीकों के खेल के मैदान में प्रवेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

"तर्क: यदि जर्सी केसरिया है, तो मन भी केसरिया हो सकता है!" - कपिल सिब्बल ने X पर लिखा।

हॉकी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर नई जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि यह डिजाइन 'कहानी बताने' और 'भारत के गौरव' को प्रदर्शित करने के लिए है। संस्था का तर्क है कि केसरिया रंग साहस, बलिदान और विजय का प्रतीक है।

तकनीकी तर्क बनाम पहचान

हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि नीली जर्सी अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों के नीले सिंथेटिक सतह के साथ मिल जाती थी, जिससे खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित होती थी। हालांकि, हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा कि यह निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिया गया था, जबकि सचिव भोला नाथ सिंह ने इस बात से इनकार किया।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय हॉकी टीम दशकों से अपनी नीली जर्सी के लिए जानी जाती रही है, जिसे 'ब्लू टाइड' के रूप में भी पहचाना जाता था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. जर्सी का रंग क्यों बदला गया?
हॉकी इंडिया के अनुसार, नीली जर्सी नीले मैदान पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती थी, इसलिए दृश्यता बढ़ाने के लिए रंग बदला गया।

2. कपिल सिब्बल की क्या आपत्ति है?
सिब्बल का मानना है कि खेल की पहचान को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।