त्रिपल जंप में कांस्य पदक जीतने वाले सेल्वा प्रभु का दावा है कि कॉमनवेल्थ खेलों के फाइनल में खाने की बिमारी ने उन्हें स्वर्ण पदक से दूर कर दिया, और अब वे एशियन गेम्स की क्वालिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • सेल्वा प्रभु ने कॉमनवेल्थ फाइनल में खाने की बिमारी झेली।
  • स्वस्थ रहते तो संभवतः स्वर्ण पदक जीतते।
  • अब 2026 एशियन गेम्स की क्वालिफिकेशन पर ध्यान।

कंटेस्ट में बिमारी का प्रभाव

नई दिल्ली— त्रिपल जंप में कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय एथलीट सेल्वा प्रभु ने बताया कि ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में उन्हें अचानक खाने की बिमारी ने झकझोर दिया। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 17.05 मीटर है, लेकिन वह केवल 16.52 मीटर की छलांग लगा सके, जिससे स्वर्ण पदक से दूर रह गये।

प्रभु ने बताया कि बिमारी के कारण उनकी ऊर्जा और विस्फोटक शक्ति पर असर पड़ा, जिससे वह अपने सर्वोत्तम प्रदर्शन नहीं दे पाए। उनका मानना है कि यदि पूरी तरह स्वस्थ रहते तो 16.70 मीटर से अधिक की छलांग लगाकर वह स्वर्ण जीत सकते थे।

इतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने पहले भी त्रिपल जंप में उल्लेखनीय प्रदर्शन दिखाया है, जैसे हरीश चंद्रवीर का 2018 एशियन खेलों में स्वर्ण। लेकिन इस खेल में स्वास्थ्य कारणों से कई एथलीट्स ने अपने लक्ष्य से कम हासिल किया है, जिससे खेल विज्ञान की महत्त्वता उजागर हुई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि एथलीट की स्वास्थ्य स्थिति सीधे प्रदर्शन को प्रभावित करती है, विशेषकर ऐसे विस्फोटक खेलों में जहाँ हर मिलीसेकंड मायने रखता है। इस घटना से खेल प्रशासन को एथलीट्स के पोषण और स्वास्थ्य निगरानी पर पुनः विचार करना चाहिए।

खेल चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा कहते हैं, "हल्की भी खाने की बिमारी से एलीट जंपर्स में विस्फोटक शक्ति में 10% तक कमी आ सकती है।"
क्या आप जानते हैं?: ग्लासगो में स्वर्ण जंप 16.72 मीटर था, जो प्रभु के कांस्य से केवल 0.20 मीटर अधिक था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यदि सेल्वा प्रभु स्वस्थ होते तो क्या वे स्वर्ण जीतते?
उत्तर: उनकी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ के आधार पर, पूरी तरह फिट रहकर 16.70 मीटर से अधिक की छलांग लगाना संभव था, जिससे स्वर्ण जीतने की संभावना बढ़ जाती।

प्रश्न 2: एशियन गेम्स के त्रिपल जंप क्वालिफिकेशन मानक क्या है?
उत्तर: भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने 16.28 मीटर को क्वालिफिकेशन मानक निर्धारित किया है, जिसका सेल्वा ने 16.79 मीटर से पार किया है।