ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के भिवानी की चार महिला मुक्केबाजों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। 'भारत के मिनी क्यूबा' कहे जाने वाले इस जिले की इन बेटियों ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर सफलता का नया अध्याय लिखा है।

मुख्य बातें

  • भिवानी की चार महिला मुक्केबाजों—साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लंबोरिया और प्रिया घंगहास ने स्वर्ण पदक जीते।
  • ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने कुल 10 पदक (7 स्वर्ण, 3 रजत) जीते।
  • यह जीत भिवानी जैसे जिले के लिए ऐतिहासिक है, जो कभी लिंगानुपात के लिए चर्चा में रहता था।
  • साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की रूबी व्हाइट की जीत का सिलसिला तोड़कर इतिहास रचा।

हरियाणा के भिवानी जिले के धनना गांव में इस समय उत्सव का माहौल है। जैसे ही खबर मिली कि साक्षी चौधरी ग्लासगो में स्वर्ण पदक जीतकर घर लौट रही हैं, पूरे गांव में तैयारियों का दौर शुरू हो गया। भिवानी, जिसे भारत का 'मिनी क्यूबा' कहा जाता है, आज अपनी बेटियों की सफलता पर गर्व कर रहा है।

2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का मुक्केबाजी अभियान अभूतपूर्व रहा। भारत ने कुल 10 पदक हासिल किए, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल थे। इन स्वर्ण पदकों में भिवानी की चार बेटियों का सबसे बड़ा योगदान रहा: साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रीति साई पवार (54 किग्रा), जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा) और प्रिया घंगहास (60 किग्रा)

बदलती सामाजिक सोच

भिवानी का इतिहास लिंगानुपात के असंतुलन के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इन महिला एथलीटों की सफलता ने समाज की सोच को बदलने का काम किया है। साक्षी के पिता मनोज धांडा बताते हैं कि साक्षी ने 12 साल की उम्र में ही अपनी प्रतिभा साबित कर दी थी। आज वह भारतीय सेना में हवलदार हैं और रिंग में अपनी ताकत से विरोधियों को धूल चटाती हैं।

भिवानी की इन बेटियों ने साबित कर दिया है कि अगर अवसर मिले, तो हरियाणा की बेटियां दुनिया के किसी भी मंच पर तिरंगा लहरा सकती हैं।

साक्षी की माँ, शीला, जो खुद कभी कबड्डी खेलती थीं, आज अपनी बेटी की उपलब्धियों पर भावुक हैं। वह कहती हैं कि उनकी बेटी ने उनके अधूरे सपनों को पूरा किया है। इसी तरह, प्रिया घंगहास की सफलता ने भी उनके परिवार और पूरे समुदाय में नई ऊर्जा भर दी है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह जीत केवल खेल तक सीमित नहीं है; यह ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली प्रतीक है। भिवानी जैसे क्षेत्रों में, जहाँ पारंपरिक पितृसत्तात्मक सोच हावी थी, वहाँ इन मुक्केबाजों ने लड़कियों के लिए करियर के नए द्वार खोले हैं।

क्या आप जानते हैं?: भिवानी को भारत का 'मिनी क्यूबा' कहा जाता है क्योंकि यहाँ मुक्केबाजी की एक समृद्ध और गहरी संस्कृति है।

Frequently Asked Questions

1. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने मुक्केबाजी में कितने स्वर्ण पदक जीते?
भारत ने कुल 7 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीते, जिनमें से 4 स्वर्ण पदक अकेले भिवानी की महिलाओं ने जीते।

2. साक्षी चौधरी कौन हैं?
साक्षी चौधरी भिवानी की एक प्रसिद्ध मुक्केबाज और भारतीय सेना की हवलदार हैं, जिन्होंने 51 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।