सांगली के एक दिहाड़ी मजदूर, अनीस शिकलगर ने अभावों के बावजूद ग्रामीण महाराष्ट्र के बच्चों को पोल वॉल्ट की ट्रेनिंग देकर एक नई राह दिखाई है। खुद के बनाए जुगाड़ू मैट और सीमित संसाधनों के साथ, वह अब राज्य स्तर के एथलीट तैयार कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • अनीस शिकलगर, जो कभी दिहाड़ी मजदूर थे, अब पोल वॉल्ट कोच बन गए हैं।
  • संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने पुराने बाइक सीटों और फोम से खुद के सुरक्षा मैट बनाए हैं।
  • उनके छात्र अथर्व मिराजकर ने राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
  • अनीस का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को नशे से बचाकर खेल के माध्यम से भविष्य संवारना है।

महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंकलखोप गांव से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। अनीस शिकलगर, जो कभी सुबह होते ही मजदूरी के लिए 'मजदूर अड्डा' जाते थे, आज गांव के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक और पोल वॉल्ट कोच बन चुके हैं। अनीस का सफर संघर्षों से भरा रहा है, लेकिन उनका जुनून उन्हें और उनके छात्रों को ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

अनीस ने बताया कि उन्होंने 27 साल की उम्र में पोल वॉल्ट शुरू किया था, जो पेशेवर एथलीट बनने के लिए काफी देर थी। उन्होंने देखा कि उनके गांव के बच्चे आसानी से नशे की गिरफ्त में आ रहे थे। इस समस्या को रोकने के लिए उन्होंने एक छात्र को दौड़ने (रनिंग) की ट्रेनिंग देने की कोशिश की, लेकिन उस छात्र ने पोल वॉल्ट सीखने की जिद की। यहीं से अनीस के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ।

जुगाड़ और नवाचार: संसाधनों की कमी को मात

पोल वॉल्ट के लिए आवश्यक उपकरण जैसे लैंडिंग मैट और फाइबरग्लास पोल बहुत महंगे होते हैं। एक दिहाड़ी मजदूर के लिए ₹4.5 लाख का मैट खरीदना नामुमकिन था। इसके समाधान के लिए अनीस ने अद्भुत नवाचार किया। उन्होंने पुरानी बाइक सीटों, फोम, स्पंज और नदी किनारे की नरम मिट्टी का उपयोग करके खुद के सुरक्षा मैट तैयार किए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे (infrastructure) की भारी कमी है। अनीस जैसे व्यक्ति न केवल खेल को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि वे सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक मजबूत दीवार भी खड़े कर रहे हैं।

अनीस शिकलगर की कहानी यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों का अभाव कभी भी सपनों के आड़े नहीं आ सकता।

अनीस के मार्गदर्शन में अथर्व मिराजकर जैसे छात्र राज्य स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसके अलावा, नंदिनी मोटगटे जैसी छात्राओं ने भी इस खेल में रुचि दिखाई है, जिससे उनके माता-पिता को उम्मीद है कि उनकी बेटियां अनुशासन और खेल के माध्यम से नाम कमाएंगी।

क्या आप जानते हैं?: पोल वॉल्ट एक ऐसा खेल है जिसमें एथलीट एक लंबे पोल के माध्यम से अपनी क्षैतिज गति को लंबवत ऊंचाई में बदल देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अनीस शिकलगर कौन हैं?
अनीस सांगली के एक पूर्व दिहाड़ी मजदूर हैं जो अब ग्रामीण छात्रों को पोल वॉल्ट की मुफ्त ट्रेनिंग देते हैं।

2. पोल वॉल्ट के लिए किन उपकरणों की आवश्यकता होती है?
इसमें एक फाइबरग्लास पोल और सुरक्षा के लिए एक लैंडिंग मैट की आवश्यकता होती है, जो काफी महंगे होते हैं।