फॉर्मूला ई के सह-संस्थापक अल्बर्टो लोंगो ने भारत में रेस वापस लाने की इच्छा जताई है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोई सक्रिय बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने भारतीय शहरों से पहल करने का आह्वान किया है।
- फॉर्मूला ई भारत लौटने के लिए तैयार है, लेकिन किसी भारतीय शहर से कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला है।
- एक फॉर्मूला ई रेस स्थानीय अर्थव्यवस्था में लगभग 80-100 मिलियन यूरो का योगदान देती है।
- अगली पीढ़ी की Gen4 कारों के आने से ट्रैक चयन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
लंदन में एक मीडिया संवाद के दौरान, फॉर्मूला ई के सह-संस्थापक और मुख्य चैंपियनशिप अधिकारी अल्बर्टो लोंगो ने भारत के प्रति अपनी उत्सुकता व्यक्त की। 2023 में हैदराबाद में आयोजित पहली भारतीय रेस की सफलता को याद करते हुए, लोंगो ने कहा कि भारत इस खेल के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है और प्रशंसक पूरे साल उनकी रेसों का अनुसरण करते हैं।
लोंगो ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि वर्तमान में कोई 'लाइव बातचीत' नहीं हो रही है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई भारतीय शहर मेजबानी के लिए आगे आता है, तो वे तुरंत वापस आने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, "भारत वापस आने से ज्यादा खुशी मुझे और कुछ नहीं देगा।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, फॉर्मूला ई की वापसी केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक उत्प्रेरक का काम करेगी। यह वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को एक आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र के रूप में पेश करता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से, यह आयोजन किसी भी शहर के लिए एक बड़ा अवसर है। लोंगो के अनुसार, एक विशिष्ट रेस स्थानीय अर्थव्यवस्था में €80-€100 मिलियन का निवेश लाती है, जिसमें मीडिया कवरेज, रसद और स्थानीय रोजगार शामिल हैं। हैदराबाद रेस के दौरान लगभग 2,000-2,500 स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था।
"भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति लोगों के नजरिए को बदलना और उसमें एक छोटा सा हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है।" - अल्बर्टो लोंगो
हालांकि, फॉर्मूला ई के सीईओ जेफ डोड्स ने एक तकनीकी चुनौती की ओर इशारा किया है। चैंपियनशिप अब Gen4 कारों की ओर बढ़ रही है, जो पहले से कहीं अधिक तेज होंगी। चूंकि ये रेस स्ट्रीट सर्किट पर होती हैं, इसलिए ऐसे ट्रैक की आवश्यकता होगी जो इन कारों की पूरी क्षमता को संभालने में सक्षम हों।
भारत में महिंद्रा, इंफोसिस और टाटा (जगुआर टीसीएस) जैसे बड़े साझेदारों की मौजूदगी इस खेल के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। लोंगो का मानना है कि जिस तरह भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी की चर्चाएं हो रही हैं, वही उत्साह फॉर्मूला ई के लिए भी दिखना चाहिए।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: फॉर्मूला ई भारत में वापस क्यों नहीं आ रही है?
उत्तर: लोंगो के अनुसार, समस्या इच्छा की कमी नहीं बल्कि आधिकारिक निमंत्रण की कमी है। वर्तमान में किसी भारतीय शहर ने मेजबानी के लिए पहल नहीं की है।
प्रश्न 2: फॉर्मूला ई रेस से स्थानीय शहर को क्या लाभ होता है?
उत्तर: यह स्थानीय अर्थव्यवस्था में लगभग 80-100 मिलियन यूरो का योगदान देता है और हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है।