हरियाणा के सोनीपत की एक अकादमी ने भारतीय हॉकी में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पूर्व भारतीय कप्तान प्रीतम रानी सिवाच और उनके बेटे यशदीप ने वर्ल्ड कप में एक साथ खेलकर इतिहास रच दिया है।
- प्रीतम रानी सिवाच और उनके बेटे यशदीप वर्ल्ड कप में खेलने वाले पहले माँ-बेटे बने।
- सोनीपत स्थित उनकी अकादमी से 5 भारतीय खिलाड़ी वर्तमान वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं।
- प्रीतम रानी सिवाच ने अपने करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाकर खेल जगत में मिसाल पेश की है।
भारतीय हॉकी के इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण दर्ज किया गया है। नीदरलैंड्स में आयोजित हो रहे हॉकी वर्ल्ड कप में, पूर्व भारतीय कप्तान प्रीतम रानी सिवाच के बेटे यशदीप सिवाच ने अपना डेब्यू किया है। इसके साथ ही, प्रीतम और यशदीप विश्व कप के मैदान पर एक साथ उतरने वाले पहले माँ-बेटे का जोड़ा बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
एक अकादमी, पाँच सितारे
यह सफलता केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। प्रीतम रानी सिवाच और उनके पति कुलदीप द्वारा सोनीपत, हरियाणा में स्थापित की गई अकादमी ने भारतीय हॉकी की पौध तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान महिला विश्व कप में इस अकादमी से प्रशिक्षित कुल पांच खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा हैं, जिनमें डिफेंडर ज्योति, मिडफील्डर नेहा गोयल और शिल्पी दाबस, तथा युवा फॉरवर्ड साक्षी राणा शामिल हैं।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह सफलता केवल प्रशिक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि उस अटूट जुनून का परिणाम है जो इस परिवार ने खेल के प्रति दिखाया है। एक समय में पशुओं के चरने वाली भूमि पर बनी यह अकादमी आज देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का केंद्र बन चुकी है।
"जब मजदूर घर बनाता है, तो वह उसे बनाना जारी रखता है" - प्रीतम रानी सिवाच का यह कथन उनके समर्पण को दर्शाता है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
प्रीतम रानी सिवाच की यात्रा प्रेरणादायक है। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान भी प्रशिक्षण जारी रखा और प्रसव के मात्र सात महीने बाद मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए वापसी की। उन्होंने न केवल अपना वजन नियंत्रित किया, बल्कि भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।
दिलचस्प बात यह है कि यशदीप ने शुरुआत में हॉकी के बजाय तैराकी को चुना था। लेकिन जब सर्दियों में स्विमिंग पूल बंद हुए, तो उन्होंने हॉकी स्टिक उठाई और देखते ही देखते वे राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन गए।
Why This Matters
यह घटना दर्शाती है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी के बावजूद, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से वैश्विक स्तर पर सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह कहानी खेल जगत में महिलाओं की बढ़ती शक्ति और पारिवारिक समर्थन के महत्व को भी रेखांकित करती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: प्रीतम रानी सिवाच और यशदीप का क्या संबंध है?
उत्तर: प्रीतम रानी सिवाच एक पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान हैं और यशदीप उनके पुत्र हैं।
प्रश्न 2: इस अकादमी से और कौन से प्रसिद्ध खिलाड़ी निकले हैं?
उत्तर: इस अकादमी ने नेहा गोयल, निशा वारसी और शर्मिला देवी जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार किया है।