17 वर्षीय ब्रिटिश ग्रैंडमास्टर श्रेयास रॉयल ने इतिहास रचते हुए सबसे कम उम्र के ब्रिटिश चैंपियनशिप विजेता बनने का गौरव हासिल किया है। इस विशेष साक्षात्कार में जानें उनके संघर्ष, सफलता और शतरंज के प्रति उनके जुनून की पूरी कहानी।
- श्रेयास रॉयल 17 वर्ष की आयु में इतिहास के सबसे कम उम्र के ब्रिटिश शतरंज चैंपियन बने।
- उन्होंने 1989 के माइकल एडम्स के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
- उनका परिवार कभी यूके में निर्वासन (deportation) के संकट से जूझ रहा था, जिसे शतरंज ने बचाया।
- श्रेयास अपनी गणना क्षमता (calculation skills) और मानसिक स्थिरता को अपनी सफलता का राज मानते हैं।
शतरंज की बिसात पर एक नया सितारा चमक रहा है। 17 वर्षीय श्रेयास रॉयल ने न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, बल्कि इतिहास के पन्नों में अपना नाम भी दर्ज करा लिया है। डार्टफोर्ड, केंट के रहने वाले श्रेयास ने हाल ही में ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप जीतकर 1989 में स्थापित माइकल एडम्स के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। वह अब इतिहास के सबसे कम उम्र के ब्रिटिश चैंपियन बन गए हैं।
श्रेयास की यह सफलता केवल खेल तक सीमित नहीं है; यह एक जीवन रक्षक कहानी भी है। जब वे केवल नौ वर्ष के थे, तब उनका परिवार यूके में निर्वासन के गंभीर संकट का सामना कर रहा था। उस कठिन समय में, श्रेयास की असाधारण शतरंज प्रतिभा ने एक ढाल का काम किया। तत्कालीन गृह सचिव साजिद जाविद ने उनके भविष्य को देखते हुए परिवार को यूके में रहने की अनुमति दी थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि श्रेयास रॉयल की यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे खेल किसी परिवार के भाग्य को पूरी तरह बदल सकता है। उनकी सफलता वैश्विक शतरंज परिदृश्य में यूके की स्थिति को मजबूत करती है और उभरते हुए युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है।
"श्रेयास का खेल केवल गणना पर आधारित नहीं है, बल्कि उनकी मानसिक मजबूती उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती है।"
अपनी जीत के बारे में बात करते हुए, श्रेयास ने बताया कि उन्होंने अपनी पिछली गलतियों से सीखा है। उन्होंने कहा, "पिछली बार मैं अंत में लड़खड़ा गया था, लेकिन इस बार मैंने अपनी मानसिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया और केवल अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेलने पर ध्यान दिया।" हालांकि, उन्हें आगामी ओलंपियाड के लिए अंग्रेजी राष्ट्रीय टीम में जगह न मिल पाने का खेद है, लेकिन वे चयनकर्ताओं के निर्णय का सम्मान करते हैं।
श्रेयास के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। उनके पिता, जितेंद्र सिंह, ने बताया कि 'रॉयल' उनका पारिवारिक नाम नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता ने एक अंकशास्त्री (numerologist) की सलाह पर इसे एक शुभ नाम के रूप में चुना था। यूके में, उनके नाम के कारण उन्हें अक्सर टूर्नामेंटों में 'प्रिंस' या 'किंग' कहकर संबोधित किया जाता है।
खेल के अलावा, श्रेयास एक संतुलित जीवन जीने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने बॉक्सिंग भी सीखी है, जो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहने में मदद करती है। वे क्रिकेट, फुटबॉल और टेबल टेनिस के भी शौकीन हैं। उनका मानना है कि शतरंज के अलावा अन्य गतिविधियों में शामिल होना बुरा खेल खेलने वाले दिनों में दिमाग को शांत रखने के लिए आवश्यक है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: श्रेयास रॉयल की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
उत्तर: श्रेयास का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी गणना करने की क्षमता (calculation skills) है।
प्रश्न 2: क्या श्रेयास रॉयल का परिवार मूल रूप से भारतीय है?
उत्तर: हाँ, वे मूल रूप से बेंगलुरु, भारत से हैं लेकिन वर्तमान में यूके में रहते हैं।