वायु सेना में शामिल होने का सपना टूटने के बाद कोयंबटूर की नौशीन बानू चंद ने मैराथन को अपना जुनून बनाया। लगातार तीन बार दुनिया की सबसे कठिन 'तेनजिंग-हिलेरी एवरेस्ट मैराथन' पूरी करने वाली वह एकमात्र महिला धावक बनी हैं, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित कल्पना चावला पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
- नौशीन बानू चंद को उनके अद्वितीय साहस और उद्यम के लिए वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित कल्पना चावला पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
- वह लगातार तीन वर्षों (2024, 2025 और 2026) तक दुनिया की सबसे कठिन 42 किमी की तेनजिंग-हिलेरी एवरेस्ट मैराथन पूरी करने वाली एकमात्र महिला एथलीट हैं।
- वैमानिकी इंजीनियरिंग (Aeronautical Engineering) स्नातक नौशीन कभी भारतीय वायु सेना में शामिल होना चाहती थीं, लेकिन चयन न होने पर उन्होंने हार नहीं मानी।
तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वाली 30 वर्षीय एथलीट नौशीन बानू चंद को उनके अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए राज्य सरकार के प्रतिष्ठित कल्पना चावला पुरस्कार (2026) से सम्मानित किया गया है। चेन्नई के सेंट जॉर्ज फोर्ट में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा। नौशीन की यह यात्रा केवल एक धावक की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को अवसरों में बदलने की एक असाधारण दास्तां है।
नौशीन ने लगातार तीन वर्षों—2024, 2025 और 2026—में दुनिया की सबसे ऊंचाई पर आयोजित होने वाली 42 किलोमीटर लंबी तेनजिंग-हिलेरी एवरेस्ट मैराथन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस बेहद कठिन और खतरनाक मैराथन में हिस्सा लेने वाले 254 अंतर्राष्ट्रीय धावकों में वह एकमात्र महिला एथलीट थीं, जिन्होंने इस दूरी को लगातार तीन बार पार कर इतिहास रचा। इससे पहले, वर्ष 2023 में उन्होंने लद्दाख में 22 किलोमीटर की इनलाइन स्केटिंग भी पूरी की थी।
कठिन दौर में दौड़ बनी मानसिक शांति का जरिया
कोयंबटूर में रहने वाली नौशीन के लिए दौड़ना केवल एक खेल नहीं, बल्कि उनके जीवन के सबसे कठिन दौर में मानसिक शांति पाने का एक जरिया था। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए नौशीन ने कहा, "एक समय हमारे परिवार में अत्यधिक भावनात्मक और मानसिक तनाव था। उस तनाव से निपटने के लिए मैंने दौड़ना शुरू किया। जो शुरुआत केवल मानसिक शांति पाने के लिए हुई थी, वह धीरे-धीरे मेरा जुनून बन गई। आज इन उपलब्धियों को हासिल करने के बाद मुझे एक अद्भुत मानसिक संतोष और पूर्णता का अहसास होता है।"
इरोड जिले के एक छोटे से गाँव से आने वाली नौशीन बचपन में अपने घर के पास के मंदिर की सीढ़ियों पर दौड़-दौड़कर चढ़ा करती थीं। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि बचपन की यह साधारण सी आदत एक दिन उन्हें एवरेस्ट की ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
वायु सेना का सपना टूटा, पर हौसला नहीं
नौशीन बानू चंद ने अपनी पढ़ाई वैमानिकी इंजीनियरिंग (Aeronautical Engineering) में पूरी की थी। उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल होकर देश की सेवा करना था। हालांकि, कड़े चयन दौर के बाद उनका चयन नहीं हो सका। इस बड़े झटके के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने चेन्नई की एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की और साथ ही अपने एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौक को जारी रखा। साल 2019 में उन्होंने ताम्बरम के पास पर्वतारोहण का कड़ा प्रशिक्षण लिया, जिसने उनके भीतर के एथलीट को एक नई दिशा दी।
एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार से आने के कारण नौशीन के लिए वित्तीय चुनौतियां हमेशा एक बड़ी बाधा रहीं। हालांकि, उनके दृढ़ संकल्प को देखते हुए सरकारी सहायता और निजी प्रायोजकों (sponsors) ने उनका समर्थन किया, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की महंगी प्रतियोगिताओं में भाग लेने में सफल रहीं। वर्तमान में वह ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माता कंपनी प्रिकॉल (Pricol) में कार्यरत हैं।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि नौशीन बानू चंद की सफलता भारत में महिला एथलीटों के बदलते परिदृश्य को दर्शाती है। पारंपरिक खेलों से इतर, अत्यधिक कठिन और साहसिक खेलों (extreme endurance sports) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। उनका यह सफर साबित करता है कि यदि युवाओं को सही समय पर वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो वे वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
"अत्यधिक ऊंचाई पर एंड्यूरेंस रनिंग (सहनशक्ति दौड़) केवल शारीरिक क्षमता का नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का खेल है। नौशीन का लगातार तीन बार एवरेस्ट मैराथन पूरा करना उनके असाधारण मानसिक और शारीरिक नियंत्रण को दर्शाता है।" - खेल विशेषज्ञ
नीचे दी गई तालिका में नौशीन बानू चंद की दो सबसे बड़ी खेल उपलब्धियों की तुलना की गई है:
| प्रतियोगिता का नाम | स्थान / ऊंचाई | दूरी और वर्ष |
|---|---|---|
| तेनजिंग-हिलेरी एवरेस्ट मैराथन | एवरेस्ट बेस कैंप, नेपाल (अत्यधिक ऊंचाई) | 42 किमी (2024, 2025, 2026) |
| इनलाइन स्केटिंग | लद्दाख, भारत (उच्च पर्वतीय क्षेत्र) | 22 किमी (2023) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कल्पना चावला पुरस्कार क्या है?
उत्तर: यह तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस पर उन महिलाओं को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है, जो साहस, बहादुरी और साहसिक उद्यम के क्षेत्र में असाधारण कार्य करती हैं।
प्रश्न 2: नौशीन बानू चंद वर्तमान में कहाँ कार्यरत हैं?
उत्तर: नौशीन वर्तमान में कोयंबटूर स्थित प्रिकॉल (Pricol) कंपनी में काम करती हैं और अपनी नौकरी के साथ-साथ मैराथन की तैयारी भी जारी रखती हैं।