दक्षिण कोरियाई फुटबॉलर्स एसोसिएशन (KPFA) ने खिलाड़ियों के स्वास्थ्य पर मंडराते गंभीर खतरे के बाद सख्त हीट प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की है। एक सर्वेक्षण में पाया गया कि अत्यधिक गर्मी के कारण कई खिलाड़ियों को बेहोशी और गंभीर निर्जलीकरण का सामना करना पड़ा है।
- 86.2% खिलाड़ियों ने अत्यधिक गर्मी में खेलने के दौरान गंभीर शारीरिक तनाव की सूचना दी।
- 64.7% खिलाड़ियों को चक्कर आने और 13% को बेहोशी का अनुभव हुआ।
- खिलाड़ियों ने मैच के समय में बदलाव और सख्त 'कूलिंग-ब्रेक' नियमों की मांग की है।
दक्षिण कोरिया में पेशेवर फुटबॉल के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कोरिया प्रो-फुटबॉलर्स एसोसिएशन (KPFA) द्वारा किए गए एक हालिया सर्वेक्षण ने खेल जगत को झकझोर कर रख दिया है। सर्वेक्षण में शामिल 536 खिलाड़ियों (K League और WK League) ने बताया कि जब मैदान का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, तो उनके स्वास्थ्य पर जानलेवा प्रभाव पड़ता है।
सर्वेक्षण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। लगभग 64.7% खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण या मैच के दौरान चक्कर आने की शिकायत की, जबकि 56.6% गंभीर निर्जलीकरण (Dehydration) का शिकार हुए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 13% खिलाड़ियों ने खेल के दौरान अस्थायी रूप से अपनी चेतना खो दी (बेहोशी)। KPFA के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी ली कुन-हो ने इसे एक 'गंभीर चेतावनी' (Red Flag) करार दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक खेल का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के कारण एथलीटों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष प्रभाव का एक उदाहरण है। यदि फुटबॉल संघ समय रहते सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव नहीं करते हैं, तो यह न केवल खिलाड़ियों के करियर को खत्म कर सकता है, बल्कि खेल की अखंडता को भी खतरे में डाल सकता है।
खिलाड़ियों को भट्टी में धकेलने के बजाय, फुटबॉल को सख्त समय सारिणी के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों की स्थिति और भी खराब है। जी सो-यून, KPFA महिला अध्यक्ष ने बताया कि कृत्रिम टर्फ (Artificial Turf) पर खेलना खिलाड़ियों को एक 'भट्टी' में रखने जैसा है, क्योंकि यह सतह गर्मी को सोखती है और वापस छोड़ती है। इसके अलावा, कई स्थानों पर एयर-कंडीशनिंग सुविधाओं का अभाव भी एक बड़ी समस्या है।
खिलाड़ियों ने मांग की है कि दक्षिण कोरियाई फुटबॉल कैलेंडर को बदलकर 'पतझड़-वसंत' (Autumn-Spring) शेड्यूल पर लाया जाए। वर्तमान में, मैच अक्सर गर्मियों के सबसे गर्म महीनों में रखे जाते हैं, जिससे खिलाड़ियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
Frequently Asked Questions
1. खिलाड़ी किन मुख्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं?
खिलाड़ी मुख्य रूप से चक्कर आना, गंभीर निर्जलीकरण और अस्थायी बेहोशी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
2. KPFA ने क्या समाधान सुझाए हैं?
KPFA ने मैच के समय में बदलाव करने, सख्त कूलिंग-ब्रेक लागू करने और फुटबॉल कैलेंडर को गर्मियों से दूर ले जाने का सुझाव दिया है।