अनसीडेड भारतीय जोड़ी ट्रीसा जोली और गायत्री गोपीचंद ने BWF विश्व चैंपियनशिप में सेमीफाइनल पहुंचकर भारत का 15 साल का सूखा खत्म कर दिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उन्होंने कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया है।
- ट्रीसा जोली और गायत्री गोपीचंद ने महिला डबल्स में सेमीफाइनल में जगह बनाई।
- भारतीय महिला डबल्स ने 15 साल बाद विश्व चैंपियनशिप में पदक जीता है।
- अनसीडेड होने के बावजूद उन्होंने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराया।
- यह भारत के लिए इस टूर्नामेंट में एकमात्र सुनिश्चित पदक है।
नई दिल्ली में आयोजित BWF विश्व चैंपियनशिप में भारतीय बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण आया है। जहाँ एक ओर भारत के बड़े नाम सेमीफाइनल तक पहुँचने में विफल रहे, वहीं अनसीडेड भारतीय जोड़ी ट्रीसा जोली और गायत्री गोपीचंद ने विपरीत परिस्थितियों को मात देते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने भारत के लिए महिला डबल्स में पदक का सूखा खत्म कर दिया है, जो पिछले 15 वर्षों से जारी था।
ट्रीसा और गायत्री ने एक रोमांचक मुकाबले में चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी जिया यी फान और झांग शू जियान को 16-21, 21-15, 21-13 से पराजित किया। इस जीत ने न केवल उन्हें पदक की गारंटी दी है, बल्कि उन्हें टूर्नामेंट की एकमात्र जीवित भारतीय खिलाड़ी भी बना दिया है।
ऐतिहासिक सफर और बड़ी जीतें
इस जोड़ी का सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने राउंड ऑफ 64 में स्पेन की पाउला लोपेज और लूसिया रोड्रिगेज को मात्र 30 मिनट में मात दी। इसके बाद राउंड ऑफ 32 में उन्होंने अमेरिका की 16वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराकर अपना दबदबा कायम रखा। राउंड ऑफ 16 में उन्होंने जापान की सातवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया, जो 2015 के बाद किसी भारतीय महिला डबल्स जोड़ी द्वारा किया गया पहला ऐसा कारनामा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह जीत?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। जहाँ पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और सात्विक-चिराग जैसे दिग्गज खिलाड़ी टूर्नामेंट से बाहर हो गए, वहीं ट्रीसा और गायत्री ने दिखाया कि भारतीय डबल्स में अपार क्षमता है। यह पदक भारत के लिए इस आयोजन में एकमात्र सुनिश्चित पोडियम फिनिश है।
ज्वला गुट्टा ने कहा, "हमारी भारतीय लड़कियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे असंभव को भी संभव कर सकती हैं! ट्रीसा और गायत्री को स्वर्ण चाहिए, उससे कम कुछ भी नहीं!"
पूर्व विश्व चैंपियन ज्वला गुट्टा, जिन्होंने 2011 में अश्विनी पोनप्पा के साथ कांस्य जीता था, ने इस जोड़ी को 'गो फॉर गोल्ड' का मंत्र दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: ट्रीसा और गायत्री ने किस टीम को हराकर पदक सुनिश्चित किया?
उत्तर: उन्होंने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी जिया यी फान और झांग शू जियान को हराया।
प्रश्न 2: भारत ने महिला डबल्स में पिछला पदक कब जीता था?
उत्तर: भारत ने 2011 में ज्वला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के माध्यम से महिला डबल्स में पदक जीता था।