भारत के खेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स के लिए चयन मानदंड को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। माता‑पिता और खेल संघों के दबाव के बावजूद कोई भी खिलाड़ी बिना निर्धारित मानकों के जापान नहीं भेजा जाएगा।
- स्पोर्ट्स मंत्रालय ने 492 एथलीटों की टीम को मंजूरी दी
- सिर्फ टॉप‑6 एशियन रैंकिंग वाले ही पात्र
- मापदंडों के उल्लंघन पर कोई अपवाद नहीं
नई दिल्ली (एसपीआई) – खेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स 2026 के लिए चयन मानदंड में कोई ढील नहीं दी है, जबकि कई माता‑पिता और खेल संघों ने दबाव बनाया था। यह कदम मंत्रालय की "मेडल‑फर्स्ट" नीति को सुदृढ़ करता है और हालिया टेनिस चयन विवाद को और तीखा बनाता है।
मंत्रालय ने 19 अगस्त से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची‑नागोया में आयोजित एशियन गेम्स के लिए कुल 492 एथलीटों की टीम को मंजूरी दी। एथलेटिक्स में सबसे बड़ी संख्या, 73 नाम, शामिल हैं। कुछ अतिरिक्त खिलाड़ियों की संभावनाएं अभी भी ओसीए की मंजूरी पर निर्भर हैं, लेकिन उन्हें भी मौजूदा मानदंडों का उल्लंघन नहीं करना होगा।
एक मंत्रालय स्रोत ने कहा, "बहुत दबाव था, कुछ माता‑पिता आए और कहा कि उनका बच्चा चयन नहीं हुआ। हमने कहा, यदि आपका बच्चा मानदंड पूरा करता है, तो वह चयनित नहीं होगा नहीं।" उन्होंने उदाहरण दिया, "यदि 100 मीटर में मेडल की उम्मीद के लिए 10 सेकंड चाहिए, तो 15 सेकंड वाले को क्यों भेजें?"
2025 में घोषित मानदंडों में कहा गया था कि केवल वे ही खिलाड़ी जो "वास्तविक मेडल जीतने की संभावना" रखते हैं, उन्हें चयन ट्रायल्स के माध्यम से चुनेंगे, जो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों द्वारा वीडियो‑रिकॉर्डेड होंगे। साथ ही, केवल एशिया में टॉप‑6 रैंकिंग वाले खिलाड़ी ही पात्र होंगे। इस कट‑ऑफ़ के कारण भारतीय फुटबॉल टीम को प्रारंभिक चरण में ही बाहर कर दिया गया था।
खेल मंत्री मनुश्क मंडविया ने स्पष्ट किया कि एशियन गेम्स को एक्सपोज़र ट्रिप नहीं माना जाना चाहिए; केवल सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को जापान भेजा जाना चाहिए। टीम चयन से असंतुष्ट कुछ एथलीटों ने अदालत तक रुख किया, जैसे घुड़सवारी के अनुष अग्रवाल का हाई कोर्ट में याचिका, जिसे अंततः सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a strict, merit‑based selection process not only boosts India's medal prospects but also sets a precedent for future multi‑sport events, compelling federations to invest in performance‑oriented training rather than lobbying.
"यदि मानदंड लचीला नहीं रहेगा तो भारतीय खेल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा," एक खेल विश्लेषक ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या चयन मानदंड में बदलाव की संभावना है?
उत्तर: वर्तमान में मंत्रालय ने मानदंड में कोई बदलाव नहीं करने की घोषणा की है।
प्रश्न 2: टेनिस में छूटे खिलाड़ियों को आगे क्या विकल्प मिलेंगे?
उत्तर: वे भविष्य के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट और राष्ट्रीय चयन ट्रायल्स में भाग लेकर अपने मानदंड सुधार सकते हैं।