NMDC हैदराबाद मैराथन के 15वें संस्करण में 26,500 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया, जिसमें छत्तीसगढ़ के 184 जनजातीय युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए विशेष 'इन्क्लूसिव रन' आकर्षण का केंद्र रहे।

  • 26,500 से अधिक धावकों ने विभिन्न श्रेणियों में भाग लिया।
  • छत्तीसगढ़ के 184 जनजातीय युवाओं ने पहली बार मैराथन में हिस्सा लिया।
  • 'इन्क्लूसिव रन' के माध्यम से 300 दिव्यांग प्रतिभागियों को मंच मिला।
  • आयोजन ने अब तक 40 गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के लिए ₹2 करोड़ से अधिक जुटाए हैं।

हैदराबाद में आयोजित NMDC हैदराबाद मैराथन 2026 के 15वें संस्करण ने खेल और सामाजिक समावेश के एक नए मानक स्थापित किए हैं। रविवार को संपन्न हुए इस भव्य आयोजन में 26,500 से अधिक धावकों ने अपनी ऊर्जा और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। इस वर्ष की मैराथन न केवल अपनी विशाल भागीदारी के लिए जानी जा रही है, बल्कि इसकी सामाजिक समावेशिता ने भी सबका ध्यान खींचा है।

विभिन्न श्रेणियों में कड़ी प्रतिस्पर्धा

मैराथन के मुख्य आयोजनों में फुल मैराथन, हाफ मैराथन और 10K दौड़ शामिल थे। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 11,000 धावकों ने फुल और हाफ मैराथन श्रेणियों में हिस्सा लिया, जबकि 9,000 प्रतिभागियों ने 10K दौड़ में भाग लिया। एलीट श्रेणी की दौड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहाँ इथियोपिया, केन्या और भारत के शीर्ष धावकों ने अपनी धाक जमाई। महिलाओं की एलीट फुल मैराथन में इथियोपिया की इमाने सेइफू विजेता बनीं, जबकि भारत की ओर से निर्मबेन ठाकोर ने शानदार प्रदर्शन किया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के बड़े पैमाने के खेल आयोजन केवल फिटनेस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक एकीकरण और आर्थिक सहायता के शक्तिशाली माध्यम बन चुके हैं। हैदराबाद मैराथन ने दिखाया है कि कैसे खेल के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सामाजिक बाधाओं को तोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

सामाजिक समावेश और जनजातीय भागीदारी

इस वर्ष के मैराथन का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा 'इन्क्लूसिव रन' रहा, जिसे 'एडवेंचर्स बियॉन्ड बैरियर्स फाउंडेशन' के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसमें लगभग 300 दिव्यांग प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें व्हीलचेयर रनर्स, दृष्टिबाधित धावक और बौनेपन (dwarfism) से जूझ रहे व्यक्ति शामिल थे। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के उन दूरदराज के गांवों से आए 184 जनजातीय युवाओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया, जहाँ NMDC की खनन परियोजनाएं संचालित होती हैं।

पुरस्कार राशि और सामाजिक योगदान

प्रतिभाशाली धावकों को प्रोत्साहित करने के लिए भारी पुरस्कार राशि भी रखी गई थी। विजेता को ₹3 लाख, दूसरे स्थान पर ₹2.5 लाख और तीसरे स्थान पर ₹2 लाख की राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही, यह आयोजन परोपकार की दिशा में भी अग्रणी रहा है। आयोजकों ने बताया कि इस मैराथन के माध्यम से अब तक 40 विभिन्न NGOs के लिए ₹2 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है।

Did You Know?: हैदराबाद मैराथन का लक्ष्य अगले तीन वर्षों के भीतर इसे पूरी तरह से कार्बन-न्यूट्रल बनाना है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस वर्ष मैराथन का मुख्य आकर्षण क्या था?
उत्तर: इस वर्ष का मुख्य आकर्षण 'इन्क्लूसिव रन' और छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं की पहली भागीदारी थी।

प्रश्न 2: विजेता धावकों को कितनी पुरस्कार राशि दी गई?
उत्तर: प्रथम विजेता को ₹3 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।