विश्व कप में खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम के चयन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कोच क्रेग फुल्टन की भूमिका और चयन समिति की अपारदर्शिता ने खेल प्रेमियों को चिंतित कर दिया है।
- विश्व कप में टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।
- हॉकी इंडिया की चयन समिति की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता की कमी के आरोप।
- कई अनुभवी चयनकर्ताओं को बिना सूचना के किनारे किया गया।
- हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर का पद सितंबर 2024 से खाली है।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम का हालिया विश्व कप अभियान एक बड़ी विफलता के रूप में समाप्त हुआ है। जहाँ एक ओर कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति और सीनियर खिलाड़ियों की निरंतरता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर असली संकट हॉकी इंडिया की चयन प्रक्रिया की अपारदर्शिता में छिपा है।
चयन समिति में पारदर्शिता का संकट
हॉकी इंडिया की वेबसाइट के अनुसार, चयन के लिए 16 चयनकर्ताओं की एक सूची है, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है। रिपोर्टों के अनुसार, कई सक्रिय चयनकर्ताओं को वर्षों से काम से दूर रखा गया है। उदाहरण के तौर पर, युवराज वाल्मीकि और चिंगलेंसना सिंह कंगजुम जैसे युवा चयनकर्ताओं को लगभग दो वर्षों से चयन कार्यों के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है, जबकि वे अभी भी आधिकारिक वेबसाइट पर सूचीबद्ध हैं।
इतना ही नहीं, रजनिश मिश्रा और समीर दद जैसे सदस्यों को भी लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। एम.एम. सोमया ने तो बार-बार अनदेखी किए जाने के बाद चयनकर्ता के पद से हटने का अनुरोध भी कर दिया था। यह स्थिति दर्शाती है कि चयन प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों का अभाव है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब एक राष्ट्रीय खेल संघ में चयन प्रक्रिया इतनी गुप्त और पक्षपाती हो जाती है, तो इसका सीधा असर मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और नए टैलेंट के उभरने पर पड़ता है। यदि घरेलू प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अनदेखा किया जाता है, तो राष्ट्रीय चैंपियनशिप केवल नौकरियों का जरिया बनकर रह जाती हैं।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी न केवल खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ती है, बल्कि खेल के भविष्य को भी अंधकार में डाल देती है।
एक अन्य चयनकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा कार्यकारी बोर्ड को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। नियुक्तियों से लेकर वित्तीय निर्णयों तक, सब कुछ कुछ ही लोगों के नियंत्रण में है। यह स्थिति हॉकी इंडिया के संविधान के विरुद्ध प्रतीत होती है, जहाँ चयनकर्ताओं की नियुक्ति और निष्कासन के लिए कार्यकारी समिति की मंजूरी अनिवार्य है।
हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर का पद भी सितंबर 2024 से खाली है, जब डच कोच हर्मन क्रुइस का कार्यकाल समाप्त हुआ था। इस नेतृत्व शून्यता ने टीम के संरचनात्मक विकास को और भी कठिन बना दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन के पीछे मुख्य कारण क्या माने जा रहे हैं?
उत्तर: मुख्य रूप से कोच की रणनीति, पुराने खिलाड़ियों पर अत्यधिक निर्भरता और चयन प्रक्रिया में सुधार की कमी को जिम्मेदार माना जा रहा है।
प्रश्न 2: क्या हॉकी इंडिया की चयन समिति में बदलाव की मांग उठ रही है?
उत्तर: हाँ, कई पूर्व और वर्तमान चयनकर्ताओं ने पारदर्शिता की कमी और बोर्ड को दरकिनार किए जाने के संबंध में गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।