मशहूर पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और खेल संघों से जवाब मांगा है। यह याचिका मातृत्व के बाद महिला एथलीटों की वापसी के लिए एक उचित नीति बनाने की मांग करती है।
- विनेश फोगाट ने मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी के लिए संरचित ढांचे की मांग की है।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, WFI और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को नोटिस जारी किया है।
- याचिका में मातृत्व के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक चयन प्रक्रिया की मांग की गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रसिद्ध पहलवान विनेश फोगाट द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय कुश्ती संघ (WFI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से जवाब मांगा है। यह याचिका महिला एथलीटों के लिए एक ऐसी नीति बनाने की मांग करती है जो उन्हें गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद प्रतिस्पर्धी खेलों में सुचारू रूप से वापसी करने में मदद कर सके।
न्यायमूर्ति स्वरा कांता शर्मा ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर के लिए निर्धारित की है। विनेश फोगाट, जिन्होंने जुलाई 2025 में एक बच्चे को जन्म दिया था, का तर्क है कि मातृत्व के कारण खेल से अनुपस्थित रहने की अवधि के लिए उन्हें कोई विशेष रियायत नहीं दी गई, जिससे उनके करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक खिलाड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह खेल जगत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा प्रश्न है। वर्तमान में, एथलीटों को उनकी रैंकिंग और चयन के लिए उन टूर्नामेंटों के प्रदर्शन पर निर्भर रहना पड़ता है जो उनकी अनुपस्थिति के दौरान आयोजित किए गए थे। यह प्रणाली अनजाने में उन महिलाओं को दंडित करती है जो मातृत्व का चुनाव करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानक एथलीटों को मातृत्व अवकाश के दौरान रैंकिंग सुरक्षा और विशेष लाभ प्रदान करते हैं, जो भारत में अभी भी एक बड़ी कमी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने अदालत में तर्क दिया कि विनेश फोगाट को मातृत्व के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए एक वैकल्पिक तंत्र की आवश्यकता है। याचिका में मांग की गई है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ होनी चाहिए, ताकि मातृत्व के कारण पिछड़ने वाली महिला एथलीटों के साथ अन्याय न हो।
ऐतिहासिक संदर्भ
दुनिया भर में, कई अंतरराष्ट्रीय खेल संघों ने 'रिटर्न टू प्ले' (Return to Play) नीतियां अपनाई हैं। ये नीतियां एथलीटों को उनके शारीरिक स्वास्थ्य और रैंकिंग को ध्यान में रखते हुए खेल में वापस आने के लिए लचीलापन प्रदान करती हैं। भारत में, हालांकि महिला एथलीटों का दबदबा बढ़ रहा है, लेकिन नीतिगत ढांचा अभी भी पुरुष-केंद्रित मानकों पर आधारित है।
तुलना: वर्तमान स्थिति बनाम प्रस्तावित मांग
| विशेषता | वर्तमान स्थिति | विनेश फोगाट की मांग |
|---|---|---|
| चयन प्रक्रिया | केवल हालिया टूर्नामेंट प्रदर्शन पर आधारित | मातृत्व के बाद वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति |
| रैंकिंग सुरक्षा | अनुपस्थिति के कारण रैंकिंग में गिरावट | मातृत्व अवधि के दौरान रैंकिंग का संरक्षण |
| नीतिगत ढांचा | स्पष्ट मातृत्व नीति का अभाव | एक संरचित और पारदर्शी राष्ट्रीय नीति |
इसके अतिरिक्त, विनेश फोगाट ने WFI द्वारा जारी किए गए दो कारण बताओ नोटिसों और उनके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को भी चुनौती दी है। WFI के वकील ने अदालत को बताया कि संघ ने सुनवाई के अवसर दिए थे, लेकिन एथलीट उपस्थित नहीं हुई। अदालत इस चुनौती पर 29 सितंबर को सुनवाई करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. विनेश फोगाट की मुख्य मांग क्या है?
विनेश फोगाट चाहती हैं कि सरकार और खेल संघ ऐसी नीति बनाएं जो मातृत्व अवकाश के बाद महिला एथलीटों को बिना किसी भेदभाव के खेल में वापसी करने का अवसर दे।
2. दिल्ली हाईकोर्ट ने किन संस्थाओं को नोटिस भेजा है?
कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय कुश्ती संघ (WFI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को नोटिस जारी किया है।